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खैरात में नहीं चाहिए जीत, लड़ कर जीतने की है आदत, इसलिए आ रही है धोनी की याद !

Bihari News

आज हमें पूर्व भारतीय कप्तान Mahendra Singh Dhoni की याद क्यों आ रही है. भारतीय टीम की श्रीलंका के खिलाफ हार के बाद क्यों आ रही है सबको धोनी की याद ? तो हम आपको बता दें इन 4 वजहों से आ रही है धोनी याद.

नंबर-1 : धोनी : भारत के अदृश्य गेंदबाज

  जब Rishabh Pant श्रीलंकाई पारी के आखिरी ओवर की पांचवीं गेंद पर विकेट के पीछे से थ्रो मारने में नाकाम रहे थे तब हम भारतीय फैंस को आपकी याद आ गई। ऐसा ही कुछ आपने 2016 टी20 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ किया था और भारत यह मुकाबला जीत गया था। अगर ऋषभ पंत वहां सटीक थ्रो मार देते तो भारतीय टीम जीत सकती थी

आपको 2016 टी20 विश्व कप तो याद ही होगा जिसमें भारत और बांग्लादेश के बीच हुए मुकाबले में अंतिम गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी ने दौड़ते हुए खिलाड़ी को रन आउट कर दिया था और भारत को हारे हुए मुकाबले में 1 रन से जीत दिलाई थी। जब ऋषभ पंत ऐसा नहीं कर सके तो एक बार फिर क्रिकेट प्रेमियों को महेंद्र सिंह धोनी की याद आई और ट्विटर पर उनके नाम की बाढ़ आ गई।

नंबर 2 : कैप्टन कूल :

इस एशिया कप में हमने भारतीय कप्तान रोहित शर्मा को काफी हताश, भ्रमित और परेशान नजर आए. उनके चेहरे पर दबाव साफ दिख रहा था. वो हर एक गेंद के बाद अपने गेंदबाज के पास दौड़कर जा रहे थे. यहां पर हमें धोनी की बहुत याद आई. चाहे कितने भी मुश्किल हालात रहते थे धोनी के चेहरे पर शिकन नहीं दिखती थी और ना ही वो अपने खिलाड़ियों पर दबाव आने देते थे. इस तरह के सिचुएशन में एक कप्तान को कैसे रहना चाहिए, धोनी ने ये पूरी दुनिया को बताया. धोनी की कप्तानी बहुत याद आती है, जब वो चौंकाने वाले फैसले लेते थे. और टीम को हारे हुए मुकाबले जितवा देते थे. धोनी ने कई बार ऐसा किया है, वो मैदान पर जितने शांत दिखते थे अंदर से उतने शांत होते नहीं थे. उनके दिमाग में तो तूफान उठा रहता था कि कैसे अपनी टीम को जीता दें. इसलिए आज हमें धोनी याद आ रहे हैं.

नंबर 3 : खिलाड़ियों से उनका बेस्ट निकलवाना

धोनी ने अपनी कप्तानी में कितने खिलाड़ियों को मैच विनर बनाया. खिलाड़ियों से कैसे उनका सर्वश्रेष्ठ निकलवाना है, ये धोनी बखूबी जानते थे. आज अगर हार्दिक पंड्या और रवीन्द्र जडेजा स्टार ऑलराउंडर कहलाते हैं तो धोनी का उसमें बड़ा योगदान है. धोनी खुद एक मैच फिनिशर थे लेकिन उन्होंने हार्दिक और जडेजा को भी इस रोल के लिए तैयार किया. धोनी दबाव में अपने खिलाड़ियों से बेस्ट निकलवा लेते थे. ये कला सिर्फ धोनी में ही थी. इसका मूलमंत्र था, अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करना, उनका समर्थन करना. धोनी ने कई मैचों में इसका उदाहरण दिया. आपको 2007 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल तो याद ही होगा. कैसे धोनी ने अंतिम ओवर जोगिन्दर शर्मा को दिया था और कैसे भारत ने वो मुकाबला जीता था. इसलिए धोनी को एक कप्तान नहीं बल्कि एक लीडर कहा जाता है. इस एशिया कप में रोहित शर्मा अपने खिलाड़ियों से बेस्ट नहीं निकलवा सके, यही कारण है कि आज हम धोनी को इतना मिस कर रहे हैं.

नंबर-4 : धोनी की स्पष्टता और दूरदर्शिता

धोनी कमाल के कप्तान थे. वो फैसले लेने से जरा भी नहीं हिचकते थे. उनके फैसलों में स्पष्टता रहती थी और वो प्लानिंग के साथ मैदान पर आते थे और उनकी प्लानिंग में रत्ती बहर भी चूक नहीं होती थी. उन्हें पता होता था किस खिलाड़ी का क्या रोल है और वो गेम को रीड करते थे और अपनी दूरदर्शिता से सटीक फैसले लेने में उन्हें महारथ हासिल थी. कभी कभी हमें लगता था, ये क्या कर दिया धोनी ने, ये कैसा फैसला ले लिया लेकिन अंत में उनका फैसला सही होता था और भारत मैच जीत जाती थी. 2011 वर्ल्ड कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ रन चेज में वो खुद युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी करने आए और नाबाद 91 रनों की पारी खेलकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई. धोनी का वह विनिंगसिक्स क्या कोई भारतीय भूल सकता है ? ये सब चीजें आज के कप्तानों में नहीं दिखती है और इसलिए हमें आप याद आते हैं धोनी.

महेंद्र सिंह धोनी जैसा खिलाड़ी शायद ही हुआ और शायद ही भविष्य में कोई आए. धोनी आपने अपने दिमाग और हुनर के बलबूते भारतीय टीम को कई मुकाबलों में जीत दिलाई है। कई मौकों पर क्रिकेट प्रेमियों ने देखा है कि आपने विकेट के पीछे से भारत को मैच में जीत दिलाई है। यही वजह है कि आज सभी भारतीय फैंस आपको याद कर रहे हैं.

माही भाई हमें पता है आपने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया है लेकिन कम से कम टीम इंडिया का मेंटोर या फिर कोच बन जाओ, कुछ नहीं तो बस टीम इंडिया से जुड़ जाओ.वहां टीम के साथ रहो, आज टीम को आपकी जरुरत है, भारत को आपकी जरुरत है. आज अगर आप होते तो टीम इंडिया को ये दिन नहीं देखना पड़ता. प्लीज धोनी आ जाओ.

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