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सहवाग की शैली में खेलने वाला बेखौफ बल्लेबाज कैसे बना बदनसीब खिलाड़ी ?

Bihari News

राहुल त्रिपाठी बायोग्राफी : सहवाग की शैली में खेलने वाला बेखौफ बल्लेबाज

सहवाग की शैली में खेलने वाला बेखौफ बल्लेबाज राहुल त्रिपाठी कैसे बना बदनसीब खिलाड़ी

क्रिकेट में कुछ ऐसे खिलाड़ी होते है जो खेलते तो हैं मगर गुमनामी की तरह और कुछ खिलाड़ी ऐसे होते है जो गुमनामी में नहीं गुमान में खेलते है

खिलाड़ी जिसने दो बार किया 6 गेंदों पर 6 छक्के लगाने का कारनामा

टीम को जितवाए कई मुकाबले लेकिन फिर भी रहा अंडररेटेड ही

साल 2017 .. दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय टी20 क्रिकेट लीग इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के दसवें सीजन की शुरुआत होने वाली थी लेकिन आईपीएल शुरू होने से दो महीने पहले यानी फरवरी में आईपीएल की नीलामी होनी थी। चूंकि फिक्सिंग में फंसी दो टीमें राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स को दो सालों के लिए बैन कर दिया गया था ऐसे में दो नई टीमों के फ्रेंचाइजी ऑक्शन में शिरकत कर रहे थे। उस ऑक्शन में 351 खिलाड़ियों के नाम आए तभी ऑक्शन की आखिरी बोली लगी और वो नाम राहुल त्रिपाठी का था। एक ऑलराउंडर जो ना ही एक मिस्ट्री बॉलर थे, सही मायनों में कहें तो वो बॉलर ही नहीं थे। महाराष्ट्र की तरफ से रणजी खेलने वाले राहुल त्रिपाठी आईपीएल के लिए अभी एक गुमनाम चेहरा थे। उन्हे कोई नहीं जानता था। लेकिन आईपीएल की नई नवेली टीम पुणे सुपर जॉइंट्स के फ्रेंचाइजी ने दांव खेला और राहुल त्रिपाठी को उनके 10 लाख के बेस प्राइस में खरीद लिया। राहुल को खरीदने की वजह फ्रेंचाइजी के पास थी क्योंकि उन्होंने एक घरेलू टी20 मुकाबले में 6 गेंदों में 6 छक्के मारे थे। वो भी एक बार नहीं बल्कि दो दो बार ऐसा करनामा किया था…..

दोस्तों आप देख रहे हैं चक दे क्रिकेट की खास पेशकश चक दे क्लिक्स और यहां हम बात करने वाले हैं भारतीय क्रिकेटर राहुल त्रिपाठी की, जो आईपीएल में पुणे सुपर जॉइंट्स की तरफ से बतौर ओपनर सहवाग की शैली में बल्लेबाजी करते हुए टीवी और अखबारों की सुर्खियां लूट चुके थे. लेकिन उनकी किस्मत ज्यादा दिनों तक मेहरबान नही रही. माथे पर बदनसीबी का तमगा लिए राहुल त्रिपाठी ने कई ऐसे दौर देखे जब उन्हें लगा उनका करियर अब दम तोड़ रहा है. दोस्तों इस विडियो में हम राहुल त्रिपाठी के अब तक के क्रिकेट करियर और जिंदगी की जानी अनजानी और अनछुए पहलुओं को जानने की कोशिश करेंगे.

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2 मार्च 1991 को झारखंड के रांची शहर में जन्मे राहुल त्रिपाठी एक आर्मी फैमली से ताल्लुक रखते हैं। राहुल त्रिपाठी के पिता अजय त्रिपाठी सेना में थे जबकि उनकी माता सुचित्रा त्रिपाठी एक हाउसवाइफ थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि राहुल त्रिपाठी का परिवार भी क्रिकेट की पृष्ठभूमि से जुड़ा रह चुका है। राहुल के पिता सेना में कर्नल जरुर थे लेकिन वे जूनियर उत्तर प्रदेश टीम से क्रिकेट खेलते थे साथ ही वे यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीम से भी क्रिकेट खेला करते थे. राहुल के बड़े भाई भी राज्य स्तरीय क्रिकेटर रह चुके हैं, जिसके कारण राहुल को बचपन से क्रिकेट खेलने और सीखने का सौभाग्य मिला.. राहुल जब 9 महीने के थे तो वे पेंसिल को बैट और इरेजर को गेंद समझ कर खेलते थे तब पिता हमेशा राहुल को बोलते थे कि अगर पढ़ोगे तो खेलने को मिलेगा। राहुल को प्रारंभिक क्रिकेट का ज्ञान अपने पिता और भाई  से ही प्राप्त हुआ. राहुल की लगन और प्रतिभा को देखते हुए 9 साल की उम्र में पिता ने उनका दाखिला लखनऊ के एक क्लब में करा दिया। यहां राहुल ने अपने खेल से कोच को प्रभावित किया। लेकिन इस बीच साल 2000 में एक वक्त ऐसा आया जब राहुल के पिता की पोस्टिंग जम्मू कश्मीर श्री नगर में हो गई .. पिता अजय त्रिपाठी पूरे परिवार को लेकर श्री नगर जाने वाले थे. लेकिन लखनऊ क्लब में राहुल के कोच ने उनके पिता से विनती की .. राहुल को लखनऊ में ही रहने दिया जाए , कोच ने कहा इस लड़के में खूब टैलेंट है अभी तो इसने खेलना शुरू किया है।यह हायर लेवल तक खेल सकता है

लेकिन इतनी छोटी उम्र में पिता राहुल को अकेले नहीं छोड़ना चाहते थे, लेकिन राहुल परिवार के साथ जम्मू चले गए । उन दिनों श्रीनगर में ज्यादा क्रिकेट नहीं होता था। बावजूद इसके राहुल को वहां तीन साल रहना पड़ा, राहुल इन तीन सालों में कुछ खास क्रिकेट नहीं खेल पाए। फिर तीन सालों बाद उनके पिता का ट्रांसफर पुणे हो गया। पिता का स्थानांतरण पुणे हो जाने के कारण राहुल की कुछ शिक्षा पुणे से पूरी हुई. राहुल को तो बचपन से ही क्रिकेट पसंद था और वह क्रिकेटर बनने का ही सपना देखा करते थे. दाएं हाथ के इस सलामी बल्लेबाज के पिता का सेना में होने के कारण लगातार ट्रांसफर होता रहता था। लेकिन जब उनके पिता का ट्रांसफर पुणे में हुआ तब जाकर असल में राहुल त्रिपाठी के क्रिकेट की शुरुआत हुई. राहुल थोड़े और बड़े हुए तो राहुल त्रिपाठी को पुणे शहर के सबसे पुराने क्रिकेट क्लब डेक्कल जिमखाना में खेलने का मौका मिला, जहां राहुल को केदार जोगलेकर और हेमंत अथालिया के रूप में दो अच्छे कोच मिले और राहुल ने उनके अंडर अपने प्रोफेशनल क्रिकेट ट्रेनिंग की शुरुआत की।

एक दिन महाराष्ट्र अंडर-15 का ट्रायल चल रहा था लेकिन राहुल इस इससे बेखबर थे. कोच को लगा कि यह ट्रायल राहुल को देना चाहिए और फिर कोच ने राहुल के पिता को फोन किया. पिता ने स्कूल में फोन कर राहुल को इसकी इत्तेला दी। पिता ने राहुल को जल्दी ग्राउंड पहुंचने को कहा लेकिन राहुल को आतेआते देर हो गया. शाम हो गई थी सूरज लगभग ढल चुका था, ट्रायल का समय भी समाप्त हो गया था. ऐसे में पिता के सेलेक्टर से काफी विनती करने के बाद सेलेक्टरों ने राहुल का ट्रायल लिया. राहुल त्रिपाठी के तीन शॉट को देखकर सेलेक्टर प्रभावित हो गए। उन्होंने राहुल को नेट्स के बाहर बुला लिया और खेल से प्रभावित होकर राहुल को महाराष्ट्र अंडर 15 में चुन लिया गया। अंडर 15 और अंडर 17 लेवल में राहुल त्रिपाठी का परफोर्मेंस जबरदस्त था लेकिन अंडर 19 में वो शून्य पर आउट हो गए. इसके बाद एक साल तक उन्हें बैठना पड़ा. साल भर बैठने के बाद राहुल को एक बार फिर अंडर 19 टीम में जगह मिली और इस बार उन्होंने खूब रन बनाए । इसके बावजूद उस साल त्रिपाठी को भारत की अंडर 19 में जगह नहीं मिली जिससे वो काफी निराश हो गए थे. लेकिन राहुल के पिता जानते थे कि एक दिन वह बड़ा क्रिकेटर बनेंगे। अब वक्त था घरेलू क्रिकेट में राहुल त्रिपाठी को जौहर दिखाने का , सो वो वक्त आ गया ..

साल 2013, यह वही साल था जब राहुल त्रिपाठी औपचारिक तौर पर क्रिकेट में कदम रखने जा रहे थे। मतलब उन्हे घरेलू क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका इसी साल मिला, जब राहुल ने अपने प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत रणजी ट्रॉफी से की. राहुल त्रिपाठी ने एमसीए यानी महाराष्ट्र क्रिकेट क्लब की ओर से खेलना शुरू किया, जिसमें उन्होंने टीम में बतौर ओपनर खेलना शुरू किया. और फिर क्या, राहुल ने दिखा दिया वो क्या हैं . उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया और फिर दिल में भारत के लिए खेलने की ललक ने उन्हें और तराशा . साल 2016-17 में विजय हजारे ट्रॉफी के दौरान उन्होंने एक मैच में 44 गेंदों पर 57 रन और फिर बंगाल के खिलाफ 95 रन बनाकर खुद को साबित किया. अगले सीजन भी राहुल का शानदार प्रदर्शन जारी रहा, साल 2018 में महाराष्ट्र की तरफ खेलते हुए राहुल ने आठ मैचों में 504 रन बनाए और टूर्नामेंट के लीडिंग रन स्कोरर रहे.

दोस्तों आप लोगों ने एक कहावत तो जरूर सुनी होगी

मजबूरी का नाम महात्मा गांधी .. लेकिन इसमें एक कहावत और जुड़नी चाहिए कि मजबूरी का नाम राहुल त्रिपाठी.. दोस्तों मैं यह बात अंत में क्यों बता रहा हूं उसे जानना चाहिए। अपनी बदनसीबी का मारा यह खिलाड़ी हमेशा अंडर रेटेड ही रहा है। राहुल के खेल की कद्र को किसी ने समझा नहीं. राहुल त्रिपाठी ने आईपीएल में खेलते हुए टीम को कई बार मैच जिताए और कई मौकों पर टीम की डूबती नैया को बचाया। लेकिन इसके बावजूद उनके लिए टीम के दरवाजे कभी खुले तो कभी बंद रहे। हैरत की बात ये है कि जो बल्लेबाज सहवाग की शैली में ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करता हो वह गुमनाम कैसे हो जाता है? खैर राहुल त्रिपाठी अभी हाल ही में खेली गई भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी 20 सीरीज का हिस्सा बने । उन्होंने इस दौरान बड़ी पारियां तो नही खेली लेकिन अपने आक्रामक खेल से सबका मन मोह लिया और टीम में आगे बने रहने के लिए छाप छोड़ दी. राहुल त्रिपाठी को ब्रेकथ्रू मिला 5 जनवरी, 2023 को, जब श्रीलंका के खिलाफ घरेलु टी20 सीरीज के दूसरे टी20 मैच में उनको प्लेइंग 11 में शामिल किया गया. अपने टी20 इंटरनेशनल डेब्यू पर त्रिपाठी कुछ खास कमाल नहीं कर पाए, नंबर-3 पर उतरे राहुल त्रिपाठी सिर्फ 5 रन बनाकर आउट हो गए थे. इसके बाद न्यूजीलैंड की टीम भारत दौरे पर आई, जिसमें एक बार फिर टी20 सीरीज के लिए राहुल त्रिपाठी को टीम में शामिल किया गया. इस सीरीज में त्रिपाठी ने अपने बल्ले की छाप छोड़ी. सीरीज के तीसरे और निर्णायक मुकाबले में राहुल त्रिपाठी ने सिर्फ 22 गेंदों में 44 रनों की आतिशी पारी खेली थी. त्रिपाठी के इस पारी ने मैच का टोन बदला था, बाद में ओपनर शुभमन गिल ने इसी मैच में अपना पहला टी20 इंटरनेशनल शतक जड़ा और भारत ने 168 रनों के विशाल अंतर से जीत दर्ज की थी.

दोस्तों चलते-चलते राहुल त्रिपाठी के छोटे से क्रिकेट करियर पर नजर डालते हैं ।

राहुल त्रिपाठी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 44 मैच खेले जिसमें उन्होंने 2359 रन बनाए उनका उच्चतम स्कोर 132 रहा .. इसके बाद लिस्ट ए के 36 मैचों मे 928 रन बनाए.. टी 20 करियर में 74 मैच में 1618 रन बनाए है रही बात भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट की तो राहुल ने महज 5 मैच खेले है जिसमें उन्होंने 19 की औसत से 97 रन बनाए हैं।

आईपीएल में पुणे सुपर जॉइंट्स, राजस्थान रॉयल्स, कोलकाता नाइट राइडर्स और सनराइजर्स हैदराबाद की तरफ से खेल चुके राहुल त्रिपाठी को टी20 के रुप में भारत की जर्सी पहनने को तो मिल गई जिसमें उन्होंने अपने निराले खेल से चयनकर्ताओं को चौंका दिया लेकिन राहुल को अभी भी टीम इंडिया के लिए एकदिवसीय और टेस्ट मैच में डेब्यू करना बाकी है 31 वर्षीय राहुल त्रिपाठी को टेस्ट और वनडे क्रिकेट की जर्सी कब मिलेगी यह कोई नही जानता , मिलेगी भी या नहीं यह सब राहुल त्रिपाठी के किस्मत की बात है।

आपके अनुसार राहुल त्रिपाठी को भारतीय टीम में मौका मिलना चाहिए या नहीं ? कमेंट में हमें बताएं.

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