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महान खिलाड़ी, जिसे अपने ही देश के लोगों ने कहा था फिक्सर !

Bihari News

सरल मुस्कान के पीछे एक फौलादी दिल रखने वाला खिलाड़ी, जिसे अपने ही देश के लोगों ने कहा फिक्सर

11 दोहरे शतक लगाने वाला बल्लेबाज, जिसने तीसरे विकेट के लिए 624 रनों की साझेदारी कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

एक कैलेंडर इयर में सबसे अधिक रन ठोकने वाला खिलाड़ी, टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 12000 रन बनाने वाला खिलाड़ी

वनडे इंटरनेशनल क्रिकेट में जिस विकेटकीपर के नाम है सबसे ज्यादा डीस्मिसल्स का रिकॉर्ड

जिसने लगातार 7 टेस्ट पारियों में फिफ्टी जड़कर बनाया विश्व रिकॉर्ड

साल 2006 ! विश्व क्रिकेट के सबसे बेहतरीन विकेटकीपर्स में गिने जाने वाले इस खिलाड़ी को हमेशा के लिए अपने ग्लव्स उतारने कह दिया गया. वनडे अंतराष्ट्रीय क्रिकेट में महेंद्र सिंह धोनी के बाद अगर किसी विकेटकीपर ने सबसे ज्यादा स्टंपिंग किए हों तो वह यही खिलाड़ी हैं और जब ऐसे खिलाड़ी को अपने ग्लव्स उतारने कह दिया जाए तो अंदाजा लगाइए उस खिलाड़ी पर क्या बीत रही होगी ?

उस फैसले से जितना निराश फैंस थे, उससे कहीं ज्यादा वह खिलाड़ी था. यह खिलाड़ी तब पूरी तरह से बिखर गया था, उनका हौंसला भी टूटने लगा था. खिलाड़ी ने फैसले का विरोध भी किया लेकिन मैनेजमेंट के आगे उनकी एक ना चली और मजबूरन उसे अपने ग्लव्स उतारने पड़े.

 इस लेख में बात होगी एक महान खिलाड़ी की, जो एक बेहतरीन विकेटकीपर होने के साथसाथ एक जबरदस्त बल्लेबाज भी थे. आज बात होगी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विकेटकीपरबल्लेबाजों में से एक श्रीलंका के महान Kumar Sangakara (कुमार संगाकारा) की. आज आपको श्रीलंकाई दिग्गज खिलाड़ी कुमार संगाकारा के जीवन और क्रिकेट करियर से जुड़ी कुछ जानीअनजानी और अनकही बातों को बताएंगे.

कुमार संगाकारा का जन्म 27 अक्टूबर, 1977 को श्रीलंका के कैंडी शहर के नजदीक मताले में हुआ था. संगाकारा की पढ़ाईलिखाई वहीं कैंडी के ट्रिनिटी कॉलेज में हुई. आपको जानकर हैरानी होगी कि स्कूली दिनों में संगाकारा को वायलिन बजाना काफी पसंद था. साथ ही वो विभिन्न खेलो जैसे बैडमिंटन, टेनिस, स्विमिंग, टेबल टेनिस और क्रिकेट में महारथ दिखा रहे थे. ‘होनहारविर्बान के होत चिकने पात‘, संगाकारा इस कहावत को सच साबित कर रहे थे. वैसे तो टेनिस संगाकारा का पसंदीदा खेल था लेकिन स्कूल के प्रिंसिपल ने उसी समय संगाकारा के अंदर छुपी उम्दा क्रिकेटिंग स्किल को पहचान लिया था और उन्हें सिर्फ क्रिकेट पर फोकस करने को कहा. संगाकारा ने भी प्रिंसिपल की बात मानी और अपना सारा ध्यान क्रिकेट पर लगा दिया. और फिर संगाकारा ने उसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. वो स्कूल की तरफ से अंडर-13, अंडर-15, अंडर-17, और अंडर-19 लेवल पर खेले. शानदार प्रदर्शन के चलते संगाकारा को स्कूल के The Trinity Lion Award और Ryde Gold Medal से नवाजा गया था. उसी दिन ये साबित हो गया था कि श्रीलंका और विश्व क्रिकेट को एक दमदार खिलाड़ी मिलने वाला है. महज 22 साल की उम्र में कुमार संगाकारा का चयन श्रीलंका ए टीम में हो गया था. साल 2000 में जिम्बाब्वे ए के खिलाफ संगाकारा द्वारा खेली गई 156 रनों की शानदार पारी ने उनके लिए नेशनल टीम के दरवाजे खोल दिए. उसी साल उनका सेलेक्शन श्रीलंका की नेशनल टीम में हो गया.

संगाकारा ने वकालत की पढ़ाई भी की लेकिन क्रिकेट से समय न मिलने की वजह से उन्हें पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी थी लकिन काम को अधूरा छोड़ना उनके स्वभाव में नहीं था इसलिए बाद में उन्होंने अपनी वकालत की पढ़ाई भी पूरी की.

साल 2000 ही वो साल था, जो कुमार संगाकारा के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसी साल दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 3 मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम में बतौर विकेटकीपरबल्लेबाज शामिल किया गया था. संगाकारा ने उस वक्त धाकड़ पिंच हिटर और लाजवाब विकेटकीपर कलुवितारना को रिप्लेस किया था. हालांकि टेस्ट टीम से पहले उनका सेलेक्शन वनडे टीम में हो गया था. संगाकारा ने अपना लोहा करियर के दूसरे वनडे मैच में ही मनवा दिया था, जब उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के खिलाफ 85 रन ठोक दिए थे और मैन ऑफ द मैचबने थे. उस पूरे सीरीज में संगाकारा ने 66 से भी अधिक की औसत से 199 रन बनाए थे. इसी दमदार प्रदर्शन के इनामस्वरुप उन्हें टेस्ट डेब्यू का मौका मिला था.

अपने पहले टेस्ट शतक के लिए संगाकारा को काफी इंतजार करना पड़ा था. वो 2 बार शतक के करीब भी पहुंचे थे, लेकिन दोनों बार वो नर्वस नाइंटीज का शिकार बने. आखिरकार, 2001 के अगस्त महीने में संगाकारा ने भारत के खिलाफ अपने करियर का पहला टेस्ट शतक जड़ ही दिया.

फिर आया साल 2002, मौका था सेकंड एशियन टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल का. श्रीलंका के सामने थी पाकिस्तान की टीम. संगाकारा बल्लेबाजी करने मैदान में उतरे और इतिहास ही रच दिया. जब संगाकारा लौटे तो उनके नाम दोहरा शतक दर्ज था. उनके इस दोहरे शतक की बदौलत श्रीलंकाई टीम ने जीत दर्ज की और टेस्ट चैंपियन बनी. वनडे सेंचुरी के लिए संगाकारा को 2003 तक का इंतजार करना पड़ा. अप्रैल, 2003 में पाकिस्तान के विरुद्ध संगाकारा ने अपने करियर का पहला वनडे शतक लगाया था.

2006 में जब श्रीलंकाई टीम के कप्तान मर्वन अटापट्टू इंजरी के चलते टीम से बाहर हो गए थे, तब महेला जयवर्धने को टीम की कमान सौंपी गई थी और कुमार संगाकारा को उनका डेप्युटी यानी वाईस कैप्टन बनाया गया था. बाद में संगाकारा टीम के रेगुलर वाईस कैप्टन बन गए थे. संगाकारा को

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेलना खूब भाया. जुलाई, 2006 में अफ्रीकी टीम के खिलाफ ही संगाकारा ने अपना दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर 287 रन बनाया था. इसी मैच में उन्होंने महेला जयवर्धेने के साथ मिलकर 624 रनों की साझेदारी की थी, जो आज भी एक वर्ल्ड रिकॉर्ड है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कुमार संगाकारा ही वो बल्लेबाज हैं, जिनके नाम टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 8000, 9000, 10000, 11000 और 12000 रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है. फरवरी, 2009 में महेला जयवर्धेने ने टीम की कप्तानी छोड़ने का फैसला लिया था तब बोर्ड ने श्रीलंका के लिए 80 टेस्ट और 246 वनडे खेल चुके 31 वर्षीय कुमार संगाकारा को जयवर्धेने का उत्तराधिकारी घोषित किया. बतौर कप्तान संगाकारा का पहला सबसे बड़ा प्रोजेक्ट था ICC टी20 वर्ल्ड कप. संगाकारा ने टूर्नामेंट में जबरदस्त नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया और अपनी टीम को सबसे बड़े टूर्नामेंट का रनरअप बनाया. लेकिन आगे संगाकारा के लिए राह कठिन थी. उसी साल हुई ICC चैंपियंस ट्रॉफी में उनकी टीम नॉकआउट स्टेज से ही बाहर हो गई थी. इसके बाद भारत दौरे पर टीम को टेस्ट सीरीज 2-0 से और वनडे सीरीज 3-1 से गंवानी पड़ी थी. ऐसे में संगाकारा की कप्तानी पर सवाल उठने लगे थे. लेकिन खिलाड़ी बड़ा तभी बनता है, जब बुरे वक्त में भी उसका हौंसला और आत्मविश्वास नहीं डगमगाता. बल्कि बड़े खिलाड़ी की पहचान भी उसी समय होती है. संगाकारा ने मजबूती से वापसी की और कई त्रिकोणीय श्रृंखला जीती. इसमें सबसे खास था श्रीलंका का ऑस्ट्रेलिया दौरा इस दौरे पर श्रीलंका ने ना सिर्फ टी20 में बल्कि वनडे सीरीज में भी हराया. यह पहली बार था जब श्रीलंकाई टीम ऑस्ट्रेलिया में कोई सीरीज जीती थी.

वर्ल्ड कप में अपने देश का प्रतिनिधित्व करना और उसे जीतना हर एक खिलाड़ी का सपना होता है. वो 2011 वर्ल्ड कप था, टूर्नामेंट के शुरू होने से एक महीने पहले ही कुमार संगाकारा ने ऐलान कर दिया था कि वो टूर्नामेंट के बाद कप्तानी छोड़ देंगे. संगकारा की टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया था, जहां उन्हें धोनी की भारतीय टीम के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. वो वर्ल्ड कप संगाकारा के लिए बतौर बल्लेबाज बेहतरीन साबित हुआ था, वो टूर्नामेंट में गजब के फॉर्म में थे. 9 मैचों में उन्होंने 465 रन बनाए थे. वो टूर्नामेंट के तीसरे सबसे सफल बल्लेबाज थे. भले ही फाइनल में श्रीलंका को हार मिली थी लेकिन आप संगाकारा के प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाइए कि 2011 वर्ल्ड कप के लिए ICC टीम ऑफ द टूर्नामेंट का कप्तान और विकेटकीपर बनाया गया था.

2011 वर्ल्ड कप फाइनल का एक मजेदार किस्सा है दोस्तों. मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल देखने जबरदस्त भीड़ उमड़ी थी. पूरा मैदान खचाखच भरा हुआ था, स्टेडियम में मौजूद लगभग 42,000 दर्शक इंडियाइंडिया के नारे लगा रहे थे और जब टॉस हुआ तो वो हुआ जो आज तक विश्व क्रिकेट में कभी नहीं हुआ था. असल में जब टीम इंडिया के कप्तान एमएस धोनी ने टॉस के लिए सिक्का उछाला तो मैच रेफरी जेफ़ संगाकारा की कॉल नहीं सुन पाए और तब टॉस दोबारा करना पड़ा. और जब फाइनल में धोनी ने विनिंग सिक्स लगाकर भारत को जीत दिलाई थी, उसके बाद युवराज सिंह ख़ुशी से धोनी को गले लगा रहे होते हैं, पीछे खड़े संगाकारा भी यह देखकर खुश हो जाते हैं. एक हारे हुए कप्तान को इस तरह खुश देखकर पूरी दुनिया संगकारा को सलाम करते हैं, उस दिन संगाकारा महान कुमार संगाकारा बन गए थे.

टूर्नामेंट के बाद संगकारा ने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ दी. 2012 में उन्हें विस्डन क्रिकेटर ऑफ द इयर से सम्मानित किया गया. कप्तानी छोड़ने के बाद उन्होंने ऐसा खेल दिखाया कि दुनिया देखती रह गई. वो अब और निडर होकर खेलने लगे और इसी चलते वो रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे थे. संगाकारा के नाम 11 डबल सेंचुरी हैं, जो सर डॉन ब्रैडमैन से मात्र 1 कम है. 2014 में कुमार संगाकारा ने 319 रन, अपना हाइएस्ट रिकॉर्ड बनाया था. बांग्लादेश के विरुद्ध 4 फरवरी, 2014 को कुमार संगाकारा ने 482 गेंदों पर 319 रनों की पारी खेली थी, इस पारी में उन्होंने 32 चौके और 8 छक्के लगाए थे. सनथ जयसूर्या और महेला जयवर्धेने के बाद वो श्रीलंका की तरफ से तिहरा शतक लगाने तीसरे बल्लेबाज बने थे. इतना ही नहीं संगाकारा ने दूसरी पारी में भी शतक जमाया था. इसी साल संगाकारा ने टी20 फॉर्मेट से संन्यास की घोषणा कर दी और 2015 में उन्होंने वनडे और टेस्ट फॉर्मेट से भी संन्यास का फैसला ले लिया. संगाकारा विश्व क्रिकेट के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शुमार हैं, जिन्होंने अपने करियर के शिखर पर रहते हुए संन्यास लिया. कुमार संगाकारा के फेयरवेल सेरेमनी में श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्राइम मिनिस्टर से लेकर खेल के क्षेत्र के बड़ेबड़े दिग्गज मौजूद थे. साल 2020 नेब श्रीलंका के पूर्व खेल मंत्री ने 2011 वर्ल्ड कप फाइनल फिक्स होने का आरोप लगाकर हाहाकार मचा दिया था, तब इस केस में संगाकारा से भी पूछताछ हुई थी लेकिन ICC ने पूर्व श्रीलंकाई मंत्री के दावों को पूरी तरह नकार दिया था.

संगाकारा के इंटरनेशनल आंकड़ों पर एक नजर

टेस्ट में 134 मुकाबलों में 12,400 रन (38 शतक, 52 अर्धशतक) (182 कैच 20 स्टंपिंग)

वनडे 404 मुकाबले, 380 पारी – 14,234 रन (25 शतक, 93 अर्धशतक) (402 कैच 99 स्टंपिंग)

टी20 इंटरनेशनल 56 मैच की 53 पारियों में 1382 रन (8 अर्धशतक) (25 कैच 20 स्टंपिंग)

इसके अलावा संगाकारा के नाम फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 20,911 रन और लिस्ट ए क्रिकेट में 19,456 रन दर्ज हैं. इस दौरान उनके बल्ले से 100 से अधिक शतक और और 200 से भी अधिक अर्धशतक निकले थे.

संगाकारा जैसे खिलाड़ी हमेशा पैदा नहीं होते, क्योंकि ये इतिहास लिखने के लिए पैदा होते हैं. संगाकारा ने न केवल श्रीलंकाई क्रिकेट बल्कि विश्व क्रिकेट का नया इतिहास लिखा. उन्होंने भले ही अब क्रिकेट खेलना छोड़ दिया हो लेकिन उनके क्रिकेट को दुनिया कभी भूला नहीं पाएगी. वो आज भी क्रिकेट से जुड़े हुए हैं, उनको अंग्रेजी में कमेंट्री करते देखा जाता है लेकिन सिर्फ ICC इवेंट्स में. इसके अलावा वो आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स के कोच भी हैं. संगाकारा जैसे इंसान का क्रिकेट से जुड़े रहना क्रिकेट के हित में ही है.

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