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कहानी उस विश्वकप की जिसने भारतीय क्रिकेट की रूप रेखा ही बदल दी

Bihari News

अब एक बार फिर से भारतीय टीम विश्व विजेता बनने के लिए तैयार है. पिछले तीन बार से जिन जिन देशों ने विश्वकप का आयोजन किया गया है उन उन देशों ने विश्वकप का खिताब अपने पास रखा है ऐसे में भारतीय टीम ने भी इस बार तैयारी पूरी कर ली है. इन सब के बीच में सबसे बड़ी बात तो यह है कि भारतीय टीम को अपने फैंस का पूरा सपोर्ट मिलने वाला है. आपको बता दें कि विश्वकप 2023 की शुरुआत 5 अक्टूबर से हो रही है. ऐसे में भारतीय टीमों के साथ ही विश्व की हर टीमों पर खिलाड़ियों के साथ ही क्रिकेट फैंस की नजर होगी. तो चलिए हम उस विश्वकप के बारे में जानते हैं जिसके जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम की सूरत ही बदल गई. दरअसल हम बात करने वाले 1983 विश्वकप के हर उस मैच की जिसके बाद भारत फाइनल तक का सफर पूरा किया था

1983 विश्वकप में भारत की शुरुआत होती है 9 जून 1983 से जब भारत की टीम वेस्टइंडीज के साथ पहली बार विश्वकप में भिड़ती है. इस मैच से पहले क्रिकेट के पंडित यही बता रहे थे कि इस मैच में भारत को बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ेगा. क्योंकि उस दौर में वेस्टइंडीज का बॉलिंग अटैक इतना खतरनाक था कि बल्लेबाज नामसुनकर खौफ खाते थे. खैर इस मैच की शुरुआत हुई. भारत की टीम ने पहले बल्लेबाजी करना शुरू किया. भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही है और महज 76 रन के स्कोर पर भारतीय टीम के तीन खिलाड़ी पवेलियन का रास्ता पकड़ चुके थे. ऐसे में इस मुश्किल समय में भारतीय टीम के लिए तारनहार बने यशपाल शर्मा जिन्होंने 9 चौके और 3 छक्कों की मदद से 89 रन की पारी खेली. इस दौरान यशपाल शर्मा का साथ दिया रोजर बिन्नी और मदन लाल ने इन दोनों की पारियों की बदौलत भारत की टीम 263 रन बनाने में कामयाब हुई थी. गेंदबाजी करते हुए भारतीय टीम का प्रदर्शन ठीक रहा. वेस्टइंडीज के भी शुरुआती तीन विकेट 76 रनों पर ही गिरे. भारत की तरह वेस्टइंडीज की तरफ से कोई भी बल्लेबाज रुककर मैदान में बल्लेबाजी नहीं कर सका. उस दौराने वेस्टइंडीज के पास विवियन रिचर्ड्स, सर क्लाइव लॉयड, गॉर्डन ग्रीनज उस टीम का हिस्सा थे लेकिन उसके बाद भी वेस्टइंडीज की पूरी टीम 263 तक नहीं पहुंच पाई और पूरी टीम 228 पर समीट गई. भारतीय टीम की तरफ से रोजर बिन्नी और रवि शास्त्री ने कमाल की गेंदबाजी की 3-3 विकेट अपने नाम दर्ज कर लिया.

इस मैच के दो दिन के बाद यानी कि 11 जून 1983 को भारत और जिम्बाब्वे के बीच में मुकाबला हुआ. ऐसे में आपको लग रहा होगा इस जिम्मबाब्वे पर भारत की टीम आसानी से मैच जीत लेगी लेकिन यह इतना आसान नहीं था. आज कि जो जिम्बाब्वे की टीम हम देखते हैं तब यह टीम नहीं थी तब इस टीम को विश्व के सबसे बेहतरीन टीमों में गिना जाता था. खैर इस मैच में जिम्बाब्वे को भारत से हार का सामना करना पड़ा था. इस मैच में जिम्मबाब्वे की टीम पहले बल्लेबाजी करते हुए 155 ही बना पाई थी ऐसे में भारत की टीम को जीत के लिए 156 रन बनाना था. भारत की तरफ से मदन लाल और रोजर बिन्नी ने बेहतरीन गेंदबाजी की थी. हालांकि जब भारत की टीम बल्लेबाजी करने आई तो इसे भी शुरुआती झटके मिले हालांकि भारतीय टीम की पारी मोहिंदर अमरनाथ और संदीप पाटिल ने संभाला. इस मैच में संदीप पाटिल ने 50 और मोहिंदर अमरनाथ ने 44 रन बनाया था. इस मैच में भारत ने जिम्बाब्वे को 5 विकेट से मात दिया भारत ने 156 रनों का टारगेट 37.3 ओवर में पूरा कर लिया. इस तरह से भारत की टीम दो लगातार मैचों में दो मैच जीत चुकी थी.

भारत का अगला मुकाबला 13 जून 1983 को विश्व की सबसे बेहतरीन टीम माने जाने वाली ऑस्ट्रेलिया से था. आपको क्या लगता है भारत यह मैच ऑ्सट्रेलिया से जीती थी आप हमें कमेंट करके जरूर बताएँ. तीसरे मुकाबले में भारत की टीम को करारी हार का सामना करना पड़ा था. ऑस्ट्रेलिया के बल्लेबाज ट्रेवर चैपल ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए शतक ठोक दिया था. इन्होंने 131 गेंदों में 11 चौके की मदद से 110 रनों की कमाल की पारी खेली. ऑस्ट्रेलिया की तरफ से किम ह्यूज ने 52 और ग्राहम येलोप ने 66 रन की पारी खेली जिसके बदौलत ऑस्ट्रेलिया की टीम 321 रन का विशाल स्कोर खड़ा कर दी थी. हालांकि इस मुकाबले में कपिल देव ने 5 विकेट हॉल किया था. जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम धारासाही हो गई. भारतीय टीम 64 रन के स्कोर पर 5 विकेट गवां चुकी थी. इसके बाद मदन लाल और कपील देव ने पारी को संभाला लेकिन भारतीय टीम का रन स्कोर बहुत आगे तक नहीं पहुंच पाया. भारत की पूरी टीम 158 पर ढेर हो गई. यह मुकाबला भारतीय टीम 162 रनों से हार गई. और इस तरह से भारत की विश्वकप में पहली हार थी.

खैर इस मैच के दो ही दिन के बाद भारत का एक बार फिर से वेस्टइंडीज के साथ मुकाबला था. भारत के खिलाड़ियों के साथ ही दर्शकों को यह लग रहा था कि हमने वेस्टइंडीज को पहले भी हराया है तो इस बार भी हरा देंगे. लेकिन इस बार मामला कुछ अलग था. वेस्टइंडीज कीटीम भी पूरी तैयारी के साथ आई थी. उसे पुराने हार का बदला लेना था. इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करना शुरू किया. इस मुकाबले में विवियन रिचर्ड्स ने दिखाना शुरू किया कि वे क्या चीज हैं. भारतीय गेंदबाजों की जमकर कुटाई हुई. इस मुकाबले में रिचर्ड्स और क्लाइव लॉयड ने कमाल की पारी खेली थी. इन दोनों बल्लेबाजों के बदौलत वेस्टइंडीज की टीम 283 तक पहुंच गई. जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी भारत की टीम के सलामी बल्लेबाज महज 21 रन पर ही सिमट गए. हालांकि इसके बाद मोहिंदर अमरनाथ और दिलीप वेंगसरकर ने पारी को संभाला जरूर लेकिन इन दोनों के जाते ही जैसे भारतीय टीम पतझड़ की तरह हो गई और वेस्टइंडीज यह मुकाबला 66 रनों से जीतने में कामयाव रही. औरइस तरह से भारत की विश्वकप में दूसरी हार थी.

इस मुकाबले के ठीक तीन दिन के बाद यानी की 18 जून को भारत और जिम्मबाब्वे के बीच में दूसरा मुकाबला खेला गया. आपको क्या लगता है इस मुकाबले में क्या हुआ होगा. इस मुकाबले में वह हुआ जो किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. इस मुकाबले में कपिल देव विश्व क्रिकेट में अपनी एक अलग पहचान बनाने में कामयाब रहे थे. इस मुकाबले में भारत की टीम ने पहले बल्लेबाजी की इसकी शुरुआत इतनी खराब थी आप इस बात से अंदाजा लगा सकते हैं कि टीम इंडिया का 5 विेकेट महज 17 रन के स्कोर पर गिर गया था. स्थिति यह थी कि हर कोई यह कह रहा था कि भारत किसी भी तरह से 100 तक पहुंच पाएगा. लेकिन जब बल्लेबाजी करने कप्तान कपिल आए और उनका साथ दिया रोजर बिन्नी ने इन दोनों ने मिलकर टीम के रन स्कोर को आगे बढ़ाया. फिर बाद में कपिल देव का साथ दिया सैयद किरमानी ने इस मुकाबले में कपिल देव ने 138 गेंदों में 16 चौके और 8 छक्कों की मदद से 175 रन की पारी खेली. पूरा विश्व इस पारी को देखर सन्न रह गया था. भारत का अब स्कोर था 267 रन. जवाब में बल्लेबाजी करने आई जिम्मबाब्वे की टीम की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही 103 रन के स्कोर पर टीम के आधे खिलाड़ी पवेलियन में थे. 235 रन आते आते पूरी टीम ऑलआउट हो गई थी. इस मैच में रोजर बिन्नी और मदन लाल ने बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया था. इस जीत के साथ ही भारत की टीम सेमीफाइनल में पहुंच गई थी. अब भारतीय टीम का मुकाबला इंग्लैंड के साथ था.

22 जून 1983 विश्वकप का सेमीफाइनल होना था. भारत के सामने थी मेजवान टीम इंग्लैंड. टॉस के बाद इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी करने के लिए मैदान पर उतरी. भारतीय गेंदबाजों ने जोश और बेहतरीन गेंदबाजी का प्रदर्शन किया. इंग्लैंड की पूरी टीम को भारतीय गेंदबाजों ने महज 213 रनों पर रोक दिया. इस मैच में कपिल देव ने 3 विकेट अपने नाम दर्ज किया. जिसमें रोजर बिन्नी और मोहिंदर अमरनाथ ने 2-2 विकेट अपने नाम दर्ज किया. सेमीफाइनल मुकाबले में बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने शानदार बल्लेबाजी का प्रदर्शन किया. इस मुकाबले में यशपाल शर्मा ने 60 रन बनाए तो वहीं संदीप पाटिल ने 51 की पारी खेली इन दोनों के अलावा मोहिंदर अमरनाथ ने 46 रनों की पारी खेली. और इस तरह से गेंदबाजों और बल्लेबाजों के बदौलत भारत सेमीफाइनल तक का सफर तय कर लिया था ऐसे में अब भारत के सामने था फाइनल मुकाबला. जिसे जीतना हर टीम की ख्वाइस होती है. और खिलाड़ी इसी विश्वकप विजेता बनने के लिए खेलता भी है. तो चलिए अब धीरे धीरे 1983 के विश्वकप फाइनल के रोमांच की तरफ बढ़ते हैं. एक तरफ विश्वकप के फाइनल में भारत पहुंची तो वहीं दूसरी तरफ. एक मैच भारत से हार चुकी और दूसरा मैच जीत चुकी वेस्टइंडीज सामने थी. इस पूरे सीरीज के लिहाज से वेस्टइंडीज और भारत का यह तीसरा मुकाबला था. इस मैच में टीम इंडिया ने पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. भारतीय टीम की शुरुआत बहुत ही खराब रही. टीम का पहला झटका सुनील गवास्कर के रूप में महज 2 रन के स्कोर पर ही लग गया था. इसके बाद श्रीकांत ने पारी को संभाला और भारत का स्कोर पहुंचा 50 रन तक. हालांकि वेस्टइंडीज जिसके नाम मात्र से बल्लेबाजों की सिट्टी पिट्टी गुम हो जाती है ऐसेमें भारतीय बल्लेबाज कहा टिकटने वाले थे भारत की पूरी टीम 183 पर सिमट गई. ऐसे में अब भारत को यह मैच बचाने के लिए बेहतरीन गेंदबाजी और क्षेत्ररक्षण की जरूरत थी. भारतीय टीम की ही तरह वेस्टइंडीज की टीम भी 66 के स्कोर पर 5 विकेट खो चुकी थी. लेकिन भारतीय टीम खुश तब हुई जब उन्हें विवियन रिचर्ड्स का विकेट हाथ लगा. रिचर्ड्स के आउट होते ही भारतीय टीम में जैसे दोबारा जान आ गई हो. नतीजा यह हुआ कि वेस्टइंडीज लो स्कोर मैच में अपने आप को संभाल नहीं पाई और पूरी की पूरी टीम महज 140 रनों पर पवेलियन चली गई. इसके साथ ही भारत विश्व कप विजेता के लिस्ट में शामिल हो गया. यह सिर्फ भारत के लिए विश्वकप नहीं था बल्कि क्रिकेट जगह में यह एक क्रांति था. इसके बाद भारतीय टीम में एक नया जोश देखने को मिला हालांकि इसके बाद भारत की टीम ने साल 2007 में टी-20 विश्वकप का खिलाब जीती उसके बाद साल 2011 में एक बार फिर से वनडे का खिताब अपने नाम दर्ज किया. अब साल 2023 में एक बार फिर से भारत विश्वकप की मेजवानी कर रहा है. ऐसे में हर भारतीय और क्रिकेट फैंस की यही इच्छा है कि भारत एक बार फिर से विश्वकप विजेता बन जाए.

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