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बिहार का एक ऐसा जिला जहाँ स्थित है द्वापर युग में एक हीं पत्थर को तराश कर बनाया गया मंदिर

Bihari News

भूमिका

आज हम बात करेंगे बिहार के उस जिले के बारे में जो बिहार का सबसे कम आबादी वाला जिला है. आज हम बात कर रहे है बिहार के शिवहर जिले के बारे में. जिसका जन्म 6 अक्टूबर 1994 में हुआ था. दरअसल शिवहर एक अलग जिला होने से पहले सीतामढ़ी जिले का एक अनुमंडल हुआ करता था. बिहार के हरेभरे और साफ़सुथरे जिलों में से एक शिवहर भी है. जहाँ कदम्ब और टीक के पेड़ मुख्य रूप से देखने को मिलते हैं. वहीँ बागमती और बूढी गंडक के कारण यह जिला अक्सर बाढ़ से प्रभावित रहता है. इस जिले का मुख्यालय शिवहर शहर में हीं है.

  • क्षेत्रफल और चौहद्दी

बता दें की 443 वर्ग किलोमीटर में फैला यह तिरहुत प्रमंडल का सबसे छोटा जिला है. 2011 के जनगणना के अनुसार यहाँ की आबादी 6,56,916 है. इस जिले में मात्र एक अनुमंडल, एक नगर परिषद्, 5 प्रखंड और 207 गाँव है. यदि इसके चौहद्दी की बात करें तो यह जिला तीन जिलों से घिरा हुआ है जहाँ सीतामढ़ी इस जिले के उत्तर और पूर्व की दिशा में अवस्थित है. वहीँ दक्षिण में मुजफ्फरपुर और पश्चिम की दिशा में पूर्वी चंपारण देखने को मिल जायेगा.

इतिहास

1991 के जनगणना के अनुसार शिवहर जिला सीतामढ़ी जिले का हीं एक अनुमंडल था. यह जिला अपने अस्तित्व में साल 1994 में आने के कारण इस जिले का अपना कुछ खास इतिहास नहीं. हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार यह क्षेत्र काफी महत्त्वपूर्ण माना गया है. क्योंकि माता सीता का सम्बन्ध सीतामढ़ी से था और शिवहर भी सीतामढ़ी का कभी एक अंग हुआ करता था. फिर आगे चल कर महाजनपद काल के समय यह क्षेत्र वैशाली के बज्जिसंघ का एक हिस्सा बन गया. उसके बाद इसे मगध साम्राज्य के एक अंग के रूप में भी देखा गया. इस क्षेत्र में मुस्लिम शासकों का शासन 13वी सदी के समय से आरम्भ हुआ. वहीँ मुस्लिम शासकों के आधिपत्य से पहले यहाँ मिथिला के शासकों का आधिपत्य देखने को मिलता था. जब अंग्रेजों का यहाँ आगमन हुआ तो यह क्षेत्र बंगाल और फिर बाद में बिहार प्रान्त का हिस्सा बना. तिरहुत के प्रमंडल बनने के बाद 1908 ईस्वी में यह क्षेत्र मुज़फ्फरपुर जिले के अंतर्गत आ गया. फिर शिवहर अपने वर्त्तमान रूप में 6 अक्टूबर वर्ष 1994 में आया.

प्रसिद्ध व्यक्ति

यदि बात करें यहाँ के प्रसिद्ध व्यक्ति की तो यहाँ योग्य और कर्मशील व्यक्ति की कमी नही लेकिन यह जिला अपने वर्त्तमान अस्तित्व में वर्ष 1994 में आया इसलिए इस जिले में किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की चर्चा हमे इन्टरनेट पर देखने को नहीं मिली. यदि आपको लगता है की आपके जानकारी में शिवहर जिले के कोई ऐसे प्रसिद्ध व्यक्ति हैं जिनकी चर्चा हमे करनी चाहिए तो उनका नाम कमेंट सेक्शन बॉक्स में लिख कर जरुर बताये.

कैसे पहुंचे

आइये अब अपने इस चर्चा में हम जानते हैं की सड़क, रेल और हवाई मार्ग के जरिये हम शिवहर कैसे पहुँच सकते हैं.

  • सड़क मार्ग

तो सबसे पहले हम बात करते हैं सड़क मार्ग की. यदि हम पटना से शिवहर जाना चाहें तो वाया NH 22 के जरिये जा सकते हैं. यह सड़क आपको दीघा ब्रिज होते हुए हाजीपुर फिर सराय, भगवानपुर, गोरौल और मुजफ्फरपुर उसके बाद यहाँ से काँटी, सोनबरषा होते हुए शिवहर को ले जाएगी. इस सड़क की दूरी 135 किलोमीटर तक में है जिसे तय करने में लगभग साढ़े तीन घंटे तक का समय लग जायेगा. इसके अलावे वाया NH22 और शिवहरमीनापुर रोड है. जिसकी दूरी 126 किलोमीटर में है. यह सड़क आपको हरमिंदर साहिब होते हुए हाजीपुर,सराय, भगवानपुर, गोरौल और मुजफ्फरपुर उसके बाद यहाँ से काँटी, सोनबरषा होते हुए शिवहर को ले जाएगी.लेकिन कई बार ट्रैफिक के वजह से इस दूरी को तय करने में लगभग चार घंटे तक का समय लग सकता है. अब हम देखते हैं वाया NH 722 को. जिसकी दूरी 138 किलोमीटर तक में है. इस दूरी को भी तय करने में लगभग चार घंटे तक का समय लग सकता है. यह सड़क आपको दीघा पुल होते हुए परमानंदपुर, नयागांव, सराय, बेला, परसा फोजी, वैशाली, सरैया फिर काँटी और सोनबर्षा होते हुए शिवहर तक ले जायेगी.

  • रेल मार्ग

चलिए अब हम जानते हैं यहाँ के रेल मार्ग के बारे में. तो इस जिले के रेलमार्ग निर्माण का मामला कई सालों से अब तक लंबित होने के कारण इस जिले का अपना कोई रेलमार्ग नहीं. लेकिन इस जिले का नजदीकी रेलमार्ग सीतामढ़ी का रेलमार्ग है. आप सीतामढ़ी पहुंच कर सड़क मार्ग के जरिये शिवहर वाया NH 227 से आ सकते हैं. इस सड़क की दूरी लगभग 26 किलोमीटर तक की है. जिसे तय करने में लगभग एक घंटे तक का समय लग सकता है. यदि आप पटना से शिवहर रेल मार्ग के जरिये आना चाहते हैं तो आपको पाटलिपुत्र जंक्शन से मुजफ्फरपुर के लिए ट्रेने मिल सकती हैं. फिर मुजफ्फरपुर से आप सड़क मार्ग के जरिये निजी वाहन और बस आदि के जरिये शिवहर जा सकते हैं. बता दें की मुजफ्फरपुर से शिवहर सड़क मार्ग से जाने के लिए वाया शिवहरमीनापुर रोड के जरिये जाना होगा. जो की लगभग 58 किलोमीटर तक की दूरी पर है. इस दूरी को तय करने में लगभग दो घंटे तक का समय लग सकता है.

  • हवाई मार्ग

यदि शिवहर के सबसे नजदीकी हवाईअड्डे की बात करे तो इसका सबसे नजदीकी हवाईअड्डा दरभंगा हवाईअड्डा है. यह हवाई अड्डा एक घरेलु हवाईअड्डा है जहाँ से देश के कई राज्यों के लिए विमाने उड़ान भरती हैं और लैंड करती है. यहाँ आने के बाद आप सड़क मार्ग के जरिये शिवहर आ सकते हैं. इसके लिए आपको वाया रुनीसैदपुरबोकचीकेओत्सा रोड होते हुए आना होगा. जिसकी दूरी लगभग 102 किलोमीटर तक की होगी. जिसे तय करने में आपको पौने तीन घंटे तक का समय लग सकता है. इसके अलावे यदि आप पटना के हवाईअड्डे पर आते हैं तो भी आप सड़क मार्ग के जरिये शिवहर आ सकते हैं. पटना से शिवहर की दूरी सड़क मार्ग के जरिये कैसे तय करें इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं.

कृषि और अर्थव्यवस्था

तो चलिए अब हम जानते हैं शिवहर जिले के कृषि और अर्थव्यवस्था के बारे में. यहाँ पर लोगों के लिए मुख्य व्यवसाय के रूप में कृषि है. यहाँ के मुख्य फसलों में चावल, गेहूं और रबी की फसले हैं. बता दें की वर्ष 2006 में शिवहर जिले को देश के 250 सबसे पिछड़े राज्यों में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा नामित किया गया. यह जिला वर्त्तमान में भी पिछड़े क्षेत्र अनुदान निधि कार्यक्रम द्वारा राशी प्राप्त कर रहा है.

पर्यटन

यदि हम इस जिले में पर्यटन की बात करें तो यहाँ कुछ अधिक पर्यटन के स्थल तो आपको देखने को नहीं मिलेंगे, लेकिन यहाँ मौजूद एक देकुली शिव मंदिर है. यह मंदिर लोगों के आस्था का केंद्र बना रहता है. बता दें की यह बाबा भुवनेश्वर नाथ का मंदिर है जो की काफी प्राचीन है. ऐसा कहा जाता है की इस मंदिर का निर्माण द्वापर काल में एक हीं पत्थर को तराश कर बनाया गया था. इस मंदिर की चर्चा कोलकाता हाई कोर्ट के एक फैसले में भी हुई थी जहाँ इस मंदिर के काफी प्राचीन होने की बात कही गयी थी. बताते चलें की नेपाल के पशुपतिनाथ और भारत के हरिहर क्षेत्र के मध्य में इस मंदिर के होने की बात 1956 में प्रकाशित अंग्रेजी गजट में देखने को मिली थी. ग्रामीणों के अनुसार इस मंदिर का उल्लेख ईस्ट इंडिया कंपनी के चौकीदारी रसीद पर भी देखने को मिलता है.

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