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जब लगाते थे सिक्स़र तो दूसरे शहर में गिरती थी गेंद, भारत के पहले कप्तान की अनकही दास्तां !

Bihari News

वो इतना लंबा छक्का मारता था कि गेंद दूसरे शहर में गिरती थी

भारतीय क्रिकेट टीम का पहला कप्तान, जिसने इंग्लैंड के खिलाफ 100 मिनट में जड़ दिए थे 153 रन

जब लगाते थे सिक्स़र तो दूसरे शहर में गिरती थी गेंद, खिलाड़ी जो लंबेलंबे छक्के मारने में था मास्टर

इंग्लैंड में एक सीजन में सबसे अधिक छक्के लगाने का रिकॉर्ड है जिसके नाम

पद्मभूषण सम्मान पाने वाले भारत के पहले क्रिकेटर, जिसके नाम पर खेली जाती है भारत की अंडर-25 घरेलु टूर्नामेंट

दोस्तों, साल 1932 में भारत को टेस्ट प्लेइंग नेशन का दर्जा मिला था और तब भारत यह दर्जा पाने वाला छठा देश था. तब जिसने भारत की कप्तानी की थी, आज उन्हीं की बात करने वाले हैं. चक दे क्रिकेट अपनी खास पेशकश में लेकर आया है भारतीय क्रिकेट के सिरमौर सीके नायडू के जीवन और क्रिकेट करियर की अनकही दास्ताँ. इस लेख में हम टीम इंडिया के सबसे पहले कप्तान दिग्गज सीके नायडू के जीवन से जुड़ी कुछ जानीअनजानी और अनकही बातों को जानने की कोशिश करेंगे.

सीके नायुडू का जन्म 31 अक्टूबर, 1895 को महाराष्ट्र के नागपुर में हुआ था. नायुडू को बचपन से ही खेल के क्षेत्र में दिलचस्पी थी. वो क्रिकेट के साथ अन्य खेलों के भी अच्छे खिलाड़ी थे. सीके नायुडू के पिता का नाम कोट्टारी सूर्य प्रकाश राव नायुडू जो राव बहादुर कोट्टारी नारायण स्वामी नायुडू के बेटे थे. वो कापू जाती से आते थे, जो आंध्र प्रदेश के मछलीपटनम से आते थे. नारायण स्वामी एक वकील थे और एक बड़े जमीनदार. इसके अलावा वो ऑल इंडिया नेशनल कांग्रेस पार्टी के एक अहम सदस्य भी थे. सीके नायुडू के छोटे भाई सीएस नायुडू भी भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेले.

नारायण स्वामी इतने संपन्न थे कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड भेजा. उनके बड़े बेटे, कोट्टारी वेकटरमन नायडू, का विवाह एलुरु के राजा प्रभाकर मूर्ति की बेटी से हुआ था और कोट्टारी रंगा राव नायडू के नाम से उनका एक बेटा था, जो इंग्लैंड के एक वकील भी थे. छोटे बेटे कोट्टारी सूर्य प्रकाश राव नायडू के चार बेटे और दो बेटियां थीं, उन्होंने बी.. और डाउनिंग कॉलेज, कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में एम.. और 1891 में मिडिल टेम्पल बार में बुलाया गया. वह अपनी शारीरिक कौशल के चलते कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कैंपस में हरक्युलिस के रूप में जाने जाते थे. वह कुछ वर्षों तक होलकर राज्य के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश रहे और कुछ समय के लिए मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी काम किया.

उन दिनों महाराजा शिवाजी राव होलकर वहां के शासक थे. महाराजा को सिर्फ 2 व्यक्तियों पर विश्वास था पहले थे सूर्य प्रकाश राव और दूसरे थे केएस नवानगर के रंजीतसिंहजीम, जो ससेक्स और इंग्लैंड के लिए खेले और कैंब्रिज में सी सूर्य प्रकाश राव नायुडू के समकालीन थे.

नायडू के दो विवाहों से नौ बच्चे थे, सात लड़कियां और दो बेटे, अर्थात् सी नारायण स्वामी नायडू और प्रकाश नायडू, जो एक भारतीय एथलीट और भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी थे. उनकी बेटी, चंद्रा नायडू, भारत की पहली महिला क्रिकेट कमेंटेटर थीं.

सीके नायुडू का पूरा नाम है कोट्टारी कनकैया नायडू है. नायडू को सिर्फ 7 साल की उम्र में स्कूल टीम में ड्राफ्ट किया गया था और छोटी उम्र में ही नायडू ने उज्जवल भविष्य का वादा कर दिया था. साल 1916 में उन्होंने बोम्बे ट्रेंगुलर में अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू किया था. नायडू की मजबूत शारीरिक बनावट से प्रभावित होकर महाराजा तुकोजी राव होलकर ने साल 1924 में उन्हें इंदौर बुलाया था.

यूरोपीयंस के खिलाफ हिंदुओं के लिए, वह नंबर 9 पर बल्लेबाजी करने आए जब उनकी टीम 7 विकेट पर 79 रन बनाकर लड़खड़ा गई थी. तब सीके नायडू ने 100 मिनट में 187 गेंदों का सामना करते हुए 153 रन जड़े थे, जिसमें 11 लंबेलंबे छक्के और 13 चौके शामिल थे. इस पारी ने नायडू को पहचान दिला दी थी.

लंबेलंबे छक्के मारने में महारथी थे नायडू

सीके नायडू लंबेलंबे छक्के लगाने के लिए जाने जाते थे तब जब मैदानों की 95 यार्ड्स की बाउंड्री होती थी, नायडू उसके भी 15 फीट बाहर छक्के मारते थे. नायडू के छक्कों का कोई जोड़ नहीं था, जबकि उस जमाने में अच्छे बल्ले भी नहीं होते थे. एक बार की बात है नायडू बोम्बे यूनिवर्सिटी के मैदान पर खेल रहे थे, तब उन्होंने इतना लंबा छक्का मारा था कि गेंद मैदान को पार करती हुई राजाबाई क्लॉक टावर पर लगी घड़ी पर जा लगी और वो टूट गई थी. इंग्लैंड में खेलते हुए एक बार सीके नायडू ने इतना लंबा छक्का मारा था कि गेंद दूसरे शहर में जाकर गिरी थी.

वह मैच इंग्लैंड की दो काउंटी टीम वॉरविकशायर और वॉस्टरशायर के बॉर्डर पर स्थित एक मैदान में खेला गया था. इन दोनों शहरों के बीच एक नदी बहती थी. सीके नायडू ने उस मैच में ऐसा छक्का मारा था कि वो नदी पार कर गया था. इस तरह गेंद नदी पार करते हुए दूसरे शहर में जाकर गिरा था.

आज जिस उम्र में क्रिकेटर संन्यास ले लेते हैं, उस उम्र में सीके नायडू भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान बने थे. उस वक्त नायडू 37 साल के थे. सीके नायडू भारतीय क्रिकेट टीम के पहले कप्तान हैं. यह ऐसा दौर था जब क्रिकेट ज्यादातर राजामहाराजा ही खेला करते थे और टीम की कमान भी उनके हाथों में ही होती थी. वर्ष 1932 में भारत टेस्ट नेशन का दर्जा हासिल करने वाला छठा देश बना था. इसी साल भारतीय टीम को टेस्ट खेलने पहली बार इंग्लैंड का दौरा करना था. उस वक्त टीम के कप्तान पोरबंदर के महाराजा हुआ करते थे लेकिन इंग्लैंड दौरे पर जाने से पहले वो अचानक बीमार हो गए और तब कर्नल सीके नायडू को देश का पहला कप्तान बनने का गौरव प्राप्त हुआ.

टीम इंडिया के पहले कप्तान कर्नल सीके नायडू ने 1932 से 1936 तक के अपने 4 साल के अंतराष्ट्रीय करियर में सिर्फ 7 टेस्ट मैच खेले थे. इस दौरान 14 पारियों में कुल 350 रन बनाए, जिसमें 2 अर्धशतक शामिल था. गेंदबाजी में भी नायडू ने 9 विकेट अपने नाम किए थे. इंग्लैंड में किसी विदेशी खिलाड़ी द्वारा एक सीजन में सबसे अधिक छक्के लगाने का रिकॉर्ड सीके नायडू के नाम है. 1932 में सीके नायडू ने इंग्लैंड में कुल 32 छक्के लगाए थे.

सीके नायडू ने होलकर टीम के अलावा आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश रणजी टीम का प्रतिनिधित्व किया. सीके नायडू के नाम 207 फर्स्ट क्लास मैचों में 12,785 रन दर्ज हैं, इस दौरान उनके बल्ले से 26 शतक और 58 अर्द्धशतक निकले थे, साथ ही गेंद से उन्होंने 411 बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई थी. क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद भी वो इस खेल से जुड़े रहे. वो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के उपाध्यक्ष तथा चयन समिति के अध्यक्ष भी रहे थे. क्रिकेट में उनके अतुलनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1955 में उन्हें तीसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मभूषणसे सम्मानित किया था. इस तरह सरकार से यह सम्मान पाने वाले वो भारत के पहले क्रिकेटर बने.

सीके नायडू को 1933 में विजडन क्रिकेटर ऑफ द इयरचुना गया था. 14 नवंबर 1967 को इंदौर में 72 साल की उम्र में नायडू ने अपने जीवन की अंतिम सांस ली थी.

– 2006 में, BCCI ने कोलोनियल सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्डनाम से एक पुरस्कार की स्थापना की, जो भारतीय क्रिकेट में खिलाड़ियों के अद्वितीय योगदान के लिए दिया जाता है. इस पुरस्कार में एक ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार दिया जाता है.

भारत की अंडर-25 घरेलु टूर्नामेंट सीके नायडू ट्रॉफी उनके नाम पर खेली जाती है.

उनके होमटाउन मछलीपट्टनम में उनकी एक प्रतिमा है, जिसका उद्घाटन भारतीय टीम के पूर्व कप्तान अनिल कुंबले ने किया था.

-1 मार्च 2023 को इंदौर के होल्कर स्टेडियम में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया गया. स्टेडियम ने बॉर्डरगावस्कर ट्रॉफी के तीसरे टेस्ट की मेजबानी की थी. प्रतिमा का अनावरण दोनों देशों के कप्तान रोहित शर्मा और स्टीव स्मिथ ने किया था.

कर्नल कोट्टारी कंकैया नायडू को प्यार से लोग सीके कहकर पुकारते थे. वह भारत के पहले कप्तान हैं. यद्दपि इंग्लैंड की टीम पूरी तरह मजबूत थी लेकिन सीके नायडू की कप्तानी में भारतीय टीम ने जमकर उनका मुकाबला किया था.

सीके नायडू ने भारत की राष्ट्रीय टीम के अलावा हिन्दू टीम, मद्रास, हैदराबाद, सेंट्रल प्रोविंस बरार, सेंट्रल इंडिया, होलकर, आंध्र और उत्तर प्रदेश के लिए क्रिकेट खेला. चक दे क्रिकेट की पूरी टीम देश के पहले कप्तान कर्नल सीके नायडू को शतशत नमन करती है.

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