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कैसे एक जिद्द ने बना दिया इतना खतरनाक खिलाड़ी ?

Bihari News

कैसे एक जिद्द ने बना दिया इतना खतरनाक खिलाड़ी ?

कैंसर को मात देकर जो बना ऑस्ट्रेलिया का वर्सटाइल क्रिकेटर

कैसे एक जिद ने बना दिया गुस्सैल और अड़ियल क्रिकेटर ?

बचपन में थी कलर ब्लाइंडनेस की बीमारी फिर भी क्रिकेटर बनने का जुनून पालने वाला जिद्दी खिलाड़ी

घरेलू मैच के दौरान पिच से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा तो क्रिकेट छोड़ने का बना लिया था मन

टीम से ड्रॉप होने पर बन गए कारपेंटर और प्लंबर

क्रिकेट जिसको जन्म दिया इंग्लैंड ने , जिसका पालन पोषण किया ऑस्ट्रेलिया ने और भारत, जिसने क्रिकेट को धर्म का दर्जा दिया। ये दुनिया के वो तीन देश है जिन्होंने क्रिकेट को एक नई पहचान दिलाई है और यही वजह है कि इन देशों के लोगों की रगों में खून से ज्यादा क्रिकेट दौड़ता है। दोस्तों, वैसे तो दुनिया के कई ऐसे देश है जहां क्रिकेटर बनने का सपना हर एक व्यक्ति देखता है। लेकिन भारत ,इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कंपटीशन कुछ ज्यादा ही होता है। क्योंकि यहां क्रिकेट का जुनून चरम पर होता है। ऐसे में किसी खिलाड़ी के लिए टीम में जगह बनाना और उसे बरकरार रखना बहुत मुश्किल होता है क्योंकि इसके लिए टैलेंटेट होने के साथ मेहनती भी होना पड़ता है। यही वजह है कि कुछ खिलाड़ी हार मान जाते है तो कुछ का तो बस संयम ही रह जाता है। आज हम जिस ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर की बात करेंगे जिसने टीम से बाहर होने के बाद कोरपेंटर और प्लंबर जैसा काम किया

हम बात कर रहे है एक ऐसे ऑस्ट्रेलियाई विकेट कीपर बल्लेबाज की, जिसने टीम को जिताने के लिए कभी ओपनिंग की जिम्मेदारी संभाली तो कभी मध्यक्रम में आकर टीम बचाया। विरोधियों के जबड़े से जीत निकालने का हुनुर वो बखूबी जानता है इतना ही नहीं उसने कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी मात दी। बचपन में कलर ब्लाइंडनेस होने के बाउजूद क्रिकेटर बनने की जिद ने उसे एक वर्सटाइल क्रिकेटर बनाकर ही छोड़ा। वो कोई और नही मैथ्यू स्कॉट वेड है।

मैथ्यू स्कॉट वेड का जन्म 26 दिसंबर 1987 को ऑस्ट्रेलिया के होबार्ट शहर में हुआ था। इनके पिता स्कॉट वेड पूर्व ऑस्ट्रेलियाई फुटबॉलर रह चुके है। और तस्मानिया फुटबॉल लीग भी खेल चुके है। इतना ही नही ए ए FL तस्मानिया सीईओ भी रह चुके है। मैथ्यू वेड के दादा जी माइकल वेड होबार्ट फुटबॉल क्लब के मुख्य रह चुके है। स्पोर्ट्स तो वेड को विरासत में मिला। जहां वो बचपन में अपने पिता और दादा के साथ फुटबॉल खेलते थे। साथ ही वेड की दिलचस्पी क्रिकेट में भी थी। वेड ने जूनियर लेवल में क्रिकेट और फुटबॉल दोनों ही उन्हे काफी मजा आता था। वेड को फुटबॉल और क्रिकेट दोनो में से किसी एक को चुनना था। बिना किसी झिझक के उन्होंने क्रिकेट में करियर बनाने का चुनाव किया। वेड ने कई लोकल क्रिकेट टूर्नामेंट खेलना शुरू किया। हालाकि उन्हे कलर ब्लाइंडनेस होने के कारण काफी कठनाइयों का सामना करना पड़ा। क्योंकि उन्हें गेंद का रंग और उसकी शेप को पहचानने में काफी परेशानी आ रही थी। यही वजह है कि उन्हें डे नाइट मैचों मे ज्यादा समस्या होती। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। वेड की समस्या सिर्फ कलर ब्लाइंडनेस ही नही थी बल्कि उन्हें टेस्टिस कैंसर भी था। एक बार वेड को फुटबॉल खेलते समय फुटबॉल उनके टेस्टिस में जा लगी । जहां गंभीर चोट हो गई और धीरे धीरे कैंसर का रूप ले लिया। हालाकि थेरेपी से कैंसर ठीक हो गया। लेकिन वो खेल से दूर हो गए। खाली समय में वेड कारपेंटर और प्लंबर का काम करने लगे।

इस बीच वेड ने वापसी की और 2006 में उनका चयन ऑस्ट्रेलिया के अंडर 19 टीम में हो गया। इसी साल उन्होंने तस्मानिया की ओर से खेलते हुए अपने घरेलू क्रिकेट का आगाज भी किया। आपको बता दें की तस्मानिया के ही ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तान रिकी पोंटिंग भी है। खैर वेड जिस तस्मानिया की टीम में थे उसी टीम में एक और विकेट कीपर बल्लेबाज था टिम पेन जिसे ब्रैड हैडिन का उत्तराधिकारी माना जा रहा था। वेड को यह बात समझ आ गई कि टिम पेन के रहते उन्हे जगह बनाना इतना आसान नहीं है। इसलिए उन्होंने विक्टोरिया से खेलने का फैसला किया। यहां से वेड की किस्मत और मेहनत दोनो से खूब साथ दिया। घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले मैथ्यू वेड को 13 अक्टूबर 2011 को साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी20 क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला। यहां उन्होंने ताबड़तोड़ प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्हें कॉमनवेल्थ सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया ।

5 फरवरी 2012 को भारत के खिलाफ वेड ने वनडे क्रिकेट में भी डेब्यू किया और पहले ही मैच में शानदार 67 रन बनाए। और मैन ऑफ द मैच बने। ओपनिंग करते हुए वेड ने रनों की बौछार करते हुए टीम को ठोस शुरुआत देने लगे। साथ ही उन्हें विकेट कीपर बल्लेबाज के तौर पर टीम उनकी पहली प्राथमिकता बन गई। वेड टीम की जरूरत के हिसाब से खेलने लगे। वही वजह थी कि उन्हें धैर्य और अक्रामक खेल को देखते हुए वेस्टइंडीज दौरे से स्वदेश लौटे ब्रैड हैडन कि जगह टेस्ट टीम में मैथ्यू वेड को जगह मिली। 7 अप्रैल 2012 को बारबाडोस के मैदान पर वेस्टइंडीज के खिलाफ वेड को टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण करने का मौका मिला। और यहां उन्होंने अपने तीसरे टेस्ट में पहला शतक जमा दिया। 2013 से वेड को टीम में तो रखा जाता लेकिन अनुभवी ब्रैड हैडिन के होने से वो नहीं खेल पाते। वेड को तभी मौका मिलता जब हैडिन चोटिल होते या फिर निजी कारण से मैच से बाहर होते।

वेड के शानदार प्रदर्शन के बावजूद होने साल 2015 विश्व कप में नहीं चुना गया। इसी साल जब हैडिन क्रिकेट से रिटायर हुए तो वेड को टेस्ट क्रिकेट में दोबारा मौका मिला। साल 2017 में टेस्ट टीम के नियमित कप्तान स्टीव स्मिथ के चोटिल होने पर वेड को टीम की कमान संभालने का मौका मिला। लेकिन दुर्भाग्यवश वेड भी बैक इंजरी की वजह से बाहर हो गए और फिर टिम पेन ने कप्तानी की। यहां टिम पेन ने कप्तानी , विकेट कीपिंग और बल्ले हर तरफ से अच्छा प्रदर्शन किया जिससे वेड बाहर ही रहे। वेड के लिए साल 2018 वो साल आया कि उन्होंने क्रिकेट छोड़ कारपेंटर का काम करना शुरू कर दिया। एक इंटरव्यू में वेड ने कहा था कि परिवार चलाने के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ा।

साल 2019 विश्व कप में एक बार फिर चयनकर्ताओं ने वेड को विश्व कप टीम में नही चुना हालाकि बाद में उस्मान ख्वाजा के चोटिल होने पर उन्हें टीम में जगह मिल गई लेकिन एक भी मैच में खेलने का मौका नही मिला। इसी साल होने वाली एशेज श्रृंखला से वेड की किस्मत फिर चमकी। टीम से ड्रॉप होने की खुन्नस के चलते वेड ने एशेज के पांच मैचों में 337 रन बना डाले जिसमें दो शतक शामिल थे। और यहीं से शुरू हुई वेड के स्टार से सुपरस्टार बनने की कहानी। साल 2020 में वेड को सिडनी टी 20 में भारत के खिलाफ कप्तानी मिली और यह मैच ऑस्ट्रेलिया जीती थी। इसके बाद वेड को 2021 के टी 20 विश्व कप में जगह मिली। लेकिन यहां कप्तान एरोन फिंच थे इस विश्व कप में वेड का एक अलग रूप देखने को मिला। खासकर पाकिस्तान का वो मैच जिसमे वेड ने पाकिस्तान के जबड़ों से जीत छीनी थीं और वेड को रातों रात स्टार बना दिया था। दुनिया अभी तक वेड को जुझारू और निडर खिलाड़ी मानती थी लेकिन विश्व कप में वेड एक फिनिशर बनकर उभरे थे। पाकिस्तान के खिलाफ इस मैच में वेड ने शाहीन अफरीदी के तीन गेंदों में तीन छक्के जड़कर पाकिस्तान को खून के आंसू रुलाए थे वेड ने 17 गेंदों पर 41 रन बना डाले थे वेड ने ऑस्ट्रेलिया को फाइनल में भी पहुंचाया जहां ऑस्ट्रेलिया पहली बार टी 20 विश्व चैंपियन बना। यहां से वेड रुकने वाले नही थे विश्व कप की फॉर्म को आगे बढ़ाया और साल 2022 में भारत के खिलाफ टी 20 सीरीज में खूब बरसे। इसी साल एक और टी 20 विश्व कप में वेड ने फिर शानदार प्रदर्शन किया। एक मैच में तो उन्हें कप्तानी भी मिली। वेड आज दुनिया के फिनिशर बल्लेबाजों की सूची में शुमार है।

36 टेस्ट 97 वनडे और 75 टी 20 खेलने वाले मैथ्यू वेड ने लगभग 5 हजार रन बनाए है। साल 2022 में गुजरात की टीम ने वेड को 2.40 करोड़ में खरीदकर शामिल किया। गुजरात टाइटंस की तरफ से वेड ने कुल 13 मैच खेले जिसमें उन्होंने 35 की औसत से 179 रन बनाए है।

दोस्तों, मैथ्यू वेड के संघर्ष भरे क्रिकेट करियर आए उतार चढ़ाव को आप कैसे देखते हैं ? आप हमें अपनी राय कमेंट करके बता सकते हैं . 

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