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इन नदियों के जुड़ने से किसानों को होगा फायदा, पानी की नहीं होगी किल्लत

Bihari News

बिहार बाढ़ के कहर से अक्सर श्रापित रहा है. लेकिन बाढ़ के कहर से बचाव के लिए बिहार सरकार तेजी से काम कर रही है. बिहार सरकार के इस नदी जोड़ योजना से बिहार के ये चार जिले मुजफ्फरपुर , सीतामढ़ी, शिवहर और पूर्वी चंपारण, को बाढ़ से राहत मिलेगी और बड़े इलाकों में सिचाई की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. इस योजना पर काम थोड़ी धीमी गति से चल रहा था, जल संसाधन विभाग ने इस रिपोर्ट को देखते हुए अधिकारीयों और इंजिनियरों को निर्देश दिया है की काम के रफ़्तार को तेज करे. उम्मीद है की वर्ष 2023 तक बिहार में बागमती, बूढी गंडक और गंडक छाड़ी गंगा नदी जोड़ योजना का काम पूरा हो जाएगा. इस नदी जोड़ योजना का काम पूरा होने से मुजफ्फरपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण को बाढ़ से राहत तो मिलेगी हीं साथ हीं साथ सिचाई सुविधाओ का भी विकास होगा.

मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो बागमतीबूढी गंडक नदी जोड़ योजना में बागमती नदी को बूढी गंडक नदी से जोड़ा जाएगा. जिसके लिए शिवहर जिला स्थित बेल्वाधर योजना पर काम शुरू है. दरअसल इस वजह से शिवहर से मोतिहारी जाने वाले स्टेट हाईवे पर आवागमन भी बाधित हो जाता था. नदी जोड़ योजना से अब यह आवागमन बाधित नही होगा.

  • बागमती नदी का पानी बूढी गंडक में ले जाने का काम भी चल रहा है. इस नदी जोड़ योजना के द्वारा बागमती नदी के पानी को बागमती धार को पुनः जीवित कर चैनल के दोनों ओर बांध बनाने का कार्य शुरू होगा जिसका मकसद है बेलवा स्थित हेड रेगुलेटर के माध्यम से बागमती नदी का पानी बूढी गंडक में पहुचाना. गंडक छाड़ी गंगा नदी जोड़ योजना पर भी काम तेज हो गया है. आपको बता दे की गोपालगंज शहर से गुजर रही छाड़ी नदी एक तरफ से गंडक से मिली हुई थी. 2001 तक गंडक और छाड़ी नदी का पानी छपरा में गंगा नदी में गिरता था. उस वक्त इस नदी की अपनी एक अलग धार्मिक मान्यता थी. उस वक्त लोग इस नदी में स्नान्ध्यान का कार्य करते थे और पानी का उपयोग पूजा पाठ में भी किया जाता था. व्यवसाय की दृष्टि से भी इसका प्रयोग किया जाता था. साल 2001 में गंडक नदी के उफान पर आने से शहर में बाढ़ का खतरा बढ़ गया था. तत्कालीन जिलापदाधिकारी द्वारा इस खतरे को देखते हुए स्लूइस गेट को बंद करवा दिया गया था. इसके बंद होते हीं गंडक नदी का पानी छाड़ी नदी में आना बंद हो गया. इसका नतीजा ये हुआ की नदी पूरी तरह से नाले में तब्दिल हो चुकी है. छाड़ी नदी को पुनः जीवन देने के लिए स्लूइस गेट जिसे वर्षो पहले बंद कर दिया गया था उसे फिर से खोल कर गंडक का पानी छाड़ी नदी में गिराने की व्यवस्था हो रही है.

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