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विश्व में पहला गणराज्य होने का गौरव प्राप्त करने वाला बिहार का यह जिला

Bihari News

भूमिका

आज हम बात करेंगे बिहार के उस जिले के बारे में जिसे दुनिया में पहला गणराज्य होने का गौरव प्राप्त है. गौतम बुद्ध के तीर्थ स्थल और महावीर के जन्मस्थली से विख्यात आज हम बात कर रहें हैं बिहार के वैशाली जिले के बारे में. यह जिला बिहार प्रान्त के तिरहुत प्रमंडल के अंतर्गत आता है. मुजफ्फरपुर जिले से अलग होकर वैशाली जिला की स्थापना 12 अक्टूबर वर्ष 1972 में हुई थी. इस जिले का मुख्यालय हाजीपुर शहर में स्थित है. यहाँ के स्थानीय लोग वज्जिका और मगही भाषा का प्रयोग करते है. ऐसा कहा जाता है की इस जिले के नामकरण रामायणकाल के एक राजा विशाल के नाम पर हुआ था.

  • चौहद्दी और क्षेत्रफल

इस जिले के चौहद्दी की यदि बात करें तो यह जिला उत्तर की दिशा में मुजफ्फरपुर, दक्षिण की दिशा में पटना, वहीँ पूरब की दिशा में समस्तीपुर और पश्चिम की दिशा में सारण जिले से घिरा हुआ है. इस जिले का क्षेत्रफल 2036 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है. यहाँ कुल 3 प्रमंडल, 16 प्रखंड और 1638 गाँव मौजूद हैं.

इतिहास

आइये अब आगे के इस चर्चा में हम जानते हैं इस जिले के इतिहास के बारे में. धार्मिक ग्रन्थों के अनुसार इस जिले का इतिहास रामायणकाल जितना पुराना है. इस क्षेत्र में राज करने वाले 34 राजाओं का उल्लेख विष्णु पुराण में भी किया गया है. वैशाली ने हीं विश्व को सर्वप्रथम गणतंत्र का ज्ञान दिया था. जिसे आज वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है. उत्तरी और मध्य भारत में छठी ईसा पूर्व के समय विकसित हुए 16 महाजनपदों में वैशाली का स्थान बहुत महत्वपूर्ण रहा है. बता दें की वज्जियों और लिच्छवियों के संघ द्वारा गणतांत्रिक शासन व्यवस्था की शुरुआत नेपाल के तराई इलाकों से लेकर गंगा के बीच फैली भूमि तक की गयी थी. यहाँ के शासक जनता के प्रतिनिधियों द्वारा हीं छठी शताब्दी ईशा पूर्व तक चुने जाते थे. मौर्य और गुप्त राजवंश ने पाटलिपुत्रा को जो की अब पटना है उसे राजधानी बनाई थी. उस वक्त वैशाली इस क्षेत्र में व्यापार और उद्योग के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ था. यहीं पर गौतम बुद्ध द्वारा कोल्हुआ के नजदीक अंतिम संबोधन दिया गया था. लिहाजा इसकी याद में तीसरी सदी ईसा पूर्व में सिंह स्तंभ का निर्माण मौर्य सम्राट अशोक द्वारा करवाया गया था. इस जिले में गौतम बुद्ध के महा परिनिर्वाण के लगभग 100 सालों बाद दूसरे बौद्ध परिषद् का आयोजन हुआ था, जिसके याद में दो बौद्ध स्तूप बनवाए गये थे. चीनी यात्री फाहियान और ह्वेनसांग पांचवी और छठी सदी के दौरान वैशाली का भ्रमण कर उन्होंने यहाँ का भव्य तरीके से वर्णन किया था. जैन धर्मावलम्बियों के लिए भी यह जिला काफी महत्वपूर्ण है. इस जिले के चेचर नामक जगह से प्राचीन मूर्तियाँ और सिक्के भी प्राप्त हुए थे जो पुरातात्विक रूप से काफी महत्वपूर्ण है. कर्नाट वंश के शासन के बाद यहाँ गयासुद्दीन एवज का शासन आ गया. चौदहवी सदी के अंत तक जौनपुर के राजाओं के हाथ में इस क्षेत्र का शासन चला गया. गंडक नदी के पार हाजीपुर में बाबर द्वारा अपने बंगाल अभियान के दौरान सैन्य की टुकड़ी को भेजा था. तिरहुत कहलाने वाले इस प्रदेश पर 18वीं के दौरान अफगानों द्वारा यहाँ पर कब्ज़ा कर लिया गया. वैशाली जिले के शहीदों की एक अहम् भूमिका स्वतंत्रता आन्दोलन के समय देखने को मिली. महात्मा गाँधी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान तीन बार वर्ष 1920, 1925 और 1934 में वैशाली जिले में आये थे. यह जिला वर्ष 1875 से लेकर 1972 तक मुजफ्फरपुर जिले का अंग बना रहा था. 12 अक्टूबर साल 1972 में यह जिले अपने वर्त्तमान अस्तित्व में आया.

प्रतिष्ठित व्यक्ति

चलिए अब आगे की चर्चा में हम जानते हैं इस जिले के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति के बारे में.

तो प्रसिद्ध व्यक्ति की सूचि में सबसे पहले हम बात करेंगे भगवान महावीर की. ये जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर थे. इनका जन्म 540 वर्ष ईसा पूर्व वैशाली गणराज्य के कुंडग्राम में हुआ था. इन्हें केवलज्ञान की प्राप्ति 12 वर्षों के कठिन तपस्या के बाद हुई थी. फिर 72 वर्ष की आयु में पावापुरी से मोक्ष की इन्हें प्राप्ति हुई.

आइये अब प्रसिद्ध व्यक्ति की सूचि में हम बात करेंगे बसावन सिंह की. इनका जन्म 23 मार्च वर्ष 1909 में वैशाली के जमालपुर में हुआ था. इन्होने स्वतंत्रता आन्दोलन के समय एक क्रांतिकारी के रूप में भाग लिया. आगे चल कर बसावन साल 1925 में योगेन्द्र शुक्ल के नेतृत्व में हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक आर्मी से जुड़ गये.

अब हम बात करते हैं बच्चन शर्मा के बारे में. इनका जन्म भी मई 1917 में वैशाली जिले के बैकुंठपुर गाँव में हुआ था. इन्होने भी स्वतंत्रता संग्राम के समय अपनी अहम भूमिका अदा की. साइमन विरोधी प्रदर्शन और नमक सत्याग्रह में इन्होने जम कर भाग लिया.

चलिए अब जानते हैं स्वतंत्रता संग्राम के समय एक क्रांतिकारी के रूप में भाग लिए अक्षयवट राय के बारे में. इनका जन्म 22 दिसम्बर वर्ष 1900 में वैशाली जिले के बिदुपुर प्रखंड में हुआ था. असहयोग आन्दोलन, नशाबंदी आन्दोलन में इन्हें रचनात्मक कार्यों में बढ़चढ़ कर भाग लेते देखा गया.

अब अपनी चर्चा में हम जानेंगे सीताराम सिंह के बारे में. इनका जन्म भी वैशाली के कुसहर खस गाँव में हुआ था. स्वतंत्रता संग्राम के आन्दोलन के समय इन्हें भी बढ़चढ़ कर भाग लेते देखा गया.

अब अंतिम में हम बात करते हैं रघुवंश प्रसाद सिंह के बारे में. इनका जन्म भी जून 1946 में बिहार के वैशाली जिले में हुआ था. ये भारत के चौदहवी लोकसभा के सदस्य होने के साथसाथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे. गिनेचुने नेताओं में से एक रघुवंश प्रसाद सिंह वहीँ थे जिन्होंने ग्रामीण विकास को एक नया मोड़ दिया था. दरअसल महात्मा गाँधी राष्ट्रिय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा इनके द्वारा हीं शुरू की गयी थी. बेबाक अंदाज और साफ़ छवि के नेता रहे रघुवंश प्रसाद सिंह की हर किसी ने सराहना की. अपने इस योजना से उन्होंने ग्रामीण ढांचे को बदल कर रख दिया.

कैसे पहुंचे

चलिए अब हम जानते हैं इस जिले के यातायात साधनों में सड़क, रेल और हवाई मार्ग के बारे में.

  • सड़क मार्ग

यातायात के साधन में हम सबसे पहले जानेंगे सड़क मार्ग के बारे में. वैशाली जिले का सड़क नेटवर्क बिहार के कई महत्वपूर्ण शहरों से जुड़ता है. इस जिले से सड़क मार्ग के द्वारा आप आसानी से कहीं भी जा सकते हैं. यदि राजधानी पटना से वैशाली आने की बात करें तो वाया पटनापरसासीवान हाईवे और NH322 के जरिये जा सकते हैं. इसकी दूरी लगभग 32 किलोमीटर तक की है. इस दूरी को तय करने में लगभग 1 घंटे तक का समय लग सकता है. यदि इसके रूट को विस्तार से देखें तो कंकरबाघ मेन रोड होते हुए NH 22 के जरिये महात्मा गाँधी सेतु पुल होते हुए वैशाली जिला के मुख्यालय हाजीपुर पहुँच जायेंगे. यदि यहाँ से आप वैशाली जाना चाहे तो NH 322 के जरिये जा सकते हैं.

इसके अलावे पटना से जीरो माइल मोर होते हुए हाजीपुर और फिर वहां से वैशाली जा सकते हैं. पटना से वैशाली मुख्यालय हाजीपुर जाने के लिए आपको बस, ऑटो या निजी गाड़ी की सुविधा आसानी से मिल जाएँगी.

यदि आप पटना से वैशाली या मुख्यालय हाजीपुर सड़क मार्ग के जरिये जा रहे हैं और यदि रास्ते में आपको BR31 के वाहन दिखने लगे तो समझ जाइये की वैशाली जिले में प्रवेश कर चुके हैं.

  • रेल मार्ग

चलिए अब हम बात करते हैं रेलमार्ग के बारे में. इस जिले में रेल पथ की कुल लम्बाई 71 किलोमीटर तक में है.यहाँ के मुख्य रेलवे स्टेशन में हाजीपुर का स्टेशन है. बता दें की हाजीपुर पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय भी है. इसका स्टेशन कोड HJP है. हाजीपुर स्टेशन के अलावे यहाँ गोरौल स्टेशन जिसका स्टेशन कोड GRL, भगवानपुर स्टेशन जिसका स्टेशन कोड BNR है आदि मौजूद है. यदि आप राजधानी पटना से ट्रेन के माध्यम से आना चाहे तो आपको आसानी से कई ट्रेने मिल जाएँगी.

  • हवाई मार्ग

चलिए अब हम बात करते हैं इस जिले के हवाई मार्ग सेवा के बारे में. बता दें की इस जिले का अपना कोई हवाई मार्ग नहीं है. लेकिन इसका सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना का हवाई अड्डा है. जहाँ आप देश के कई प्रमुख शहरों से आजा सकते हैं. उसके बाद आप पटना से हाजीपुर सड़क या रेल मार्ग के जरिये आसानी से आ सकते हैं. सड़क या रेल मार्ग के जरिये पटना से हाजीपुर कैसे जाना है इसकी चर्चा हम पहले भी कर चुके हैं.

दर्शनीय स्थल

चलिए अब जानते हैं इस जिले के दर्शनीय स्थलों के बारे में.

दर्शनीय स्थलों की सूचि में हम सबसे पहले बात करेंगे अशोक स्तंभ के बारे में. इसका निर्माण सम्राट अशोक द्वारा महात्मा बुद्ध के अंतिम उपदेश के याद में करवाया गया था. पर्यटक स्थल के रूप में पर्यटकों के बीच यह काफी प्रसिद्ध है.

आइये अब हम बात करेंगे बौद्ध स्तूप के बारे में. इसका निर्माण भी बौद्ध परिषद् के याद में हीं करवाया गया था. यहाँ दो स्तूपों का निर्माण करवाया गया था, जिसमें से गौतम बुद्ध की अस्थियाँ भी मिली है. बौद्ध अनुयायियों के लिए यह जगह काफी महत्वपूर्ण है.

अब हम बात करेंगे अभिषेक पुष्करिणी की. यहाँ मौजूद सरोवर में वैशाली गणराज्य के नव निर्वाचित शासकों को उनके पद, गोपनीयता और फिर गणराज्य के प्रति उनके निष्ठा की शपथ दिलवाई जाती थी. लिच्छवी स्तूप और विश्व शांति स्तूप भी आपको यहाँ देखने को मिल जायेंगे.

तो चलिए अब हम जानते हैं राजा विशाल के गढ़ के बारे में. ऐसा कहा जाता है की यह जगह राजा विशाल का राजमहल या फिर लिच्छवी काल का संसद हुआ करता था.

अब हम बात करेंगे भगवान् महावीर के जन्म स्थान कुण्डलपुर के बारे में. वैशाली से लगभग 4 किलोमीटर की हीं दूरी पर स्थित यह जगह है जहाँ प्राकृत जैन शास्त्र और अहिंसा संस्थान भी देखने को मिल जायेंगे. इसके अलावे यहाँ भगवान् महावीर के जन्मदिन के शुभ अवसर पर यानी बैसाख पूर्णिमा के दिन वैशाली महोत्सव का आयोजन भी बड़े हीं धूमधाम से किया जाता है. इसका आयोजन एक राजकीय उत्सव के रूप में होता है.

तो चलिए अब बात करते हैं विश्व शांति स्तूप के बारे में. इसका निर्माण जापान के एक समुदाय के द्वारा करवाया गया था. यहाँ आपको चौमुखी महादेव का मंदिर, बावन पोखर मंदिर और वैशाली संग्राहलय भी देखने को मिल जायेंगे.

अब बात करते हैं पलवैया धाम के बारे में. जो की बाबा गणीनाथ धाम से भी प्रसिद्ध है. यहाँ देश के कोनेकोने से भक्तों का जमावड़ा देखने को मिलता है.

कौनहारा घाट भी वैशाली के पावन भूमि पर हीं स्थित हिन्दू धर्म के लोगों का पवित्र स्थान है. यह घाट उसी कहानी का हिस्सा है जहाँ भागवत पुराण में वर्णित गजग्राह की लड़ाई में भगवान विष्णु स्वयं आये थे और उन्होंने अपने भक्त गजराज को जीवन दान दिया था. साथ हीं शापग्रस्त ग्राह को मुक्ति मिला.

इसके अलावे यहाँ नेपाली छावनी मंदिर भी स्थित है. जहाँ आपको नेपाली वास्तुकला का अद्भुत उदहारण देखने को मिल जायेगा.

अब अंतिम में हम बात करते हैं रामचौरा मंदिर के बारे में. प्रचलित कहानियों के अनुसार श्री राम जब अयोध्या से जनकपुर की तरफ जा रहे थे तब उन्होंने इसी जगह पर विश्राम किया था. चिन्ह प्रतिक के रूप में श्री राम के चरण यहाँ देखने को मिल जायेंगे.

कृषि और अर्थव्यवस्था

तो चलिए अब हम बात करते हैं इस जिले के कृषि और अर्थव्यवस्था के बारे में. बता दें की कृषि यहाँ के अर्थव्यवस्था में मुख्य रूप से अपनी भूमिका अदा करती है. यहाँ की मुख्य फसलों में गेंहू, चावल, मक्का और तम्बाकू शामिल है. इसके अलावे यहाँ केला भी काफी प्रसिद्ध है. केले का नाम सुनते हीं अक्सर आपके दिमाग में हाजीपुर का नाम आता होगा. हाजीपुर में आपको केले का बगान भी खूब देखने को मिल जायेगा. यहाँ के क्षेत्रीय किसान की आर्थिक स्थिति केले के बगान पर हीं निर्भर करती है.

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