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इस खिलाड़ी को दिग्गजों ने भी माना लोहा, कहा गेंदबाजों को बॉक्सर की तरह धोता है

Bihari News

चक दे क्रिकेट के आज के सेगमेंट चक दे क्लिक में हम बात करने वाले हैं एक ऐसे खिलाड़ी के बारे में जो गेंदबाजों को बॉक्सर की तरह पीटता था. कम गेंद में ज्यादा रन बनाने की क्षमता इस बल्लेबाज के पास थी. तब ही तो यह खिलाड़ी साल 2007 का टी-20 विश्वकप और साल 2011 के वनडे विश्वकप विजेता टीम का सदस्य रहा है. इस खिलाड़ी का सफर तो बहुत लंबा नहीं रहा है लेकिन इस छोटे के क्रिकेट कैरियर में इस खिलाड़ी ने खुब नाम कमाया है. बल्लेबाजी में तो इस खिलाड़ी का नाम है ही इस खिलाड़ी ने गेंदबाजी में भी अपना जलवा दिखाया है. आज हम बात करने जा रहे हैं इरफान पठान के बड़े भाई यूसुफ पठान के बारे मेंः

यूफुस पठान का जिक्र होता है तो हर किसी को याद आता है साल 2007 का टी-20 विश्वकप जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के ओपनर बोलर को फोड़ कर रख दिया था. पाकिस्तान की गेंदबाजी को पूरी तरह से तहस नहस कर दिया था. उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिर इस बल्लेबाज को वह किस तरह की बॉल दें. खैर इस मैच से पहले भी यूसुफ पठान अपनी बल्लेबाजी से जलवा दिखा चुके थे. दरअसल उस समय दिलीप ट्रॉफी का फाइनल हैदराबाद में खेला जा रहा था. यह फाइनल मैच साउथ जोन और वेस्ट जोन के खिलाफ था. इस मैच में साउथ जोन की तरफ से दिनेश कार्तिक की शानदार 183 रन के बदौलत टीम 400 रन बना सकी थी लेकिन वेस्ट जोन मात्र 251 रन ही बना पाई जिसमें युसुफ पठान ने 108 रन की शानदार पारी खेली. दूसरी पारी का जब मैच शुरू हुआ तो इसमें फिर दिनेश कार्तिक ने शतक लगाया और पूरी टीम इस बार 386 बनाने में सफर रही और वेस्ट जोन को 536 रन का लक्षय मिला, वेस्ट जोन की स्थिति यह थी कि 294 रन पर पांच विकेट पवेलियन में पहुंच चुका था ऐसे में कहा जा रहा था कि अब बस औपचारिकता ही बची है इस मैच में. फिर एंट्री होती है यूसुफ पठान की इस खिलाड़ी ने 190 गेंद में 210 की शानदारी पारी खेली और वेस्ट जोन यह मैच जीत गई. वेस्ट जोन के गेंदबाज बस देखते भर रह गए. जीत के जश्न की तैयारी कर रहे गेंदबाज भी बस गेंद को बॉउंडरी के बाहर जाते हुए देख रहे थे.

य़ूसुफ का बचपन बहुत ही गरीबी में बीता था. उनके पिता महमूद खान जामा मस्जिद में देखरेख का काम करते थे. इससे परिवार नहीं चलता था तो वे साराभाई केमिकल फैक्ट्री में 7 घंटे की शिफ्ट भी किया करते थे. 15 घंटे काम करने के बाद वे अपने परिवार का भरण पोषण कर पाते थे. इसीलिए उनकी इच्छा थी की उनके बेटे बड़े होकर इस्लामिक स्कॉलर बने. लेकिन बेटों के दिलों दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था. इन दोनों भाइयों को इतनी गरीबी में भी क्रिकेट का चस्का लगा हुआ था. जब ये दोनों भाई मस्जिद जाते थे तो वहां मोजे की बॉल बनाकर खेलते थे. गली मोहल्ले से इन दिनों भाइयों शिकायत भी घर जाती थी. लेकिन क्रिकेट के प्रति दिवानगी कहा रुकने वाली थी. गलियों में छक्के चौके लगाने वाला यह बल्लेबाज अब दत्ता गायकवाड़ की कोचिंग में क्रिकेट का गुर सीखने के लिए पहुंच गया था. यूसुफ पठान साल 2001-02 में बड़ोदरी की तरफ से रणजी टीम का हिस्सा बने. इस दौरान उन्होंने घरेलू क्रिकेट में खुब पसीना बहाया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. लेकिन उनके छोटे भाई इस दौरान इंटरनेशनल क्रिकेट में धमाल मचा रहे थे. इसी उधेड़बुन के बीच साल 2007 में आया दीलीप ट्रॉफी और यूसुफ पठान के क्रिकेट कैरियर में आया बड़ा बदलाव.

अब यूसुफ 2007 में होने वाले टी-20 विश्वकप का हिस्सा थे लेकिन किस्मत देखिए पूरे मैच के दौरान उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला. लेकिन फाइनल मैच में सगवाग के चोटिल हो जाने के बाद उन्हें मैदान में उतरने का मौका मिल गया. और वे गौतम गंभीर के साथ सलामी बल्लेबाज के तौर पर मैदान में उतरे. जैसे लग रहा हो सहवाग ही मैदान में खेल रहा हो. 8 गेंद में इन्होंने 15 रन की पारी खेली. लेकिन इतने ही देर में उन्होंने पाकिस्तान के गेंदबाज मुहम्मद आसिफ की लय खराब कर दी थी. उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया था. उसके बाद जो हुआ वह आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है. भारत टी-20 का विश्वविजेता बना. इसके बाद अगले साल यानी की साल 2008 में ढाका में पाकिस्तान खिलाफ खेलते हुए उन्होंने अपने वनडे कैरियर की शुरुआत की. इस मैच में यूसुफ ने कुछ खास नहीं किया लेकिन चयनकर्ताओं को इनसे बहुत उम्मीद थी. लेकिन यूसुफ को तो 20 ओवर का मैच चाहिए था. साल 2008 के IPL में हुए फाइनल मैच में उन्होंने 39 गेंदों में 56 रन की धमाकेदार पारी खेली और राजस्थान रॉयल यह आईपीएल जीतने में सफल रहा. इसके बाद यूसुफ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने लगी थी.

फिर आया साल 2009 भारतीय टीम श्रीलंका के दौरे पर थी और एक मैच में भारतीय टीम को बनाना था 172 रन लेकिन 115 पर सात विकेट पवेलियन में थे ऐसे में यूसुफ और इरफान की जोड़ी ने 25 गेंदों में 59 की पारी खेल कर भारत को जीत दिला दी. इसके बाद IPL में उनके द्वारा खेली गई कई पारियां आज भी यादगार है. साल 2010 में राजस्थान रॉयल की तरफ से बल्लेबाजी करते हुए उन्होंने 37 गेंदों में 100 रन बनाया था जो किसी भारतीय द्वारा बनाया गया सबसे तेज शतक आज तक इनके नाम दर्ज है. इसके बाद साल 2011 में दक्षिण अफ्रिका से साथ हुए मैच में भारत को वनडे सीरीज जीतने के लिए 268 रन बनाने थे लेकिन टीम का 8 विकेट 119 रन पर पवेलियन में पहुंच चुका था. इसके बाद यूसुफ ने वो किया जिसका किसी को उम्मीद नहीं था उन्होंने 70 गेंदों में 105 रन की धमाकेदार पारी खेली लेकिन टीम यह मैच नहीं जीत सकी पर यूसुन ने लोगों का दिल जरूर जीत लिया. मैच के बाद ग्रीम स्मिथ ने कहा था कि वो एक बॉक्सर की तरफ बल्लेबाजी करता है. यूसुफ के धमाकेदार प्रदर्शन के कारण ही 2011 के विश्वकप में उन्हें जगह मिल गई और उस दौरान नवजोत सिंह सुद्धू ने कहा था कि यूसुफ जब गेंद को मारता है तो, लगता है कि गेंद फट जाएगी. इस विश्वकप में एक मैच को छोड़ दें दो उनका प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा लेकिन वे विश्वविजेता टीम के सदस्य के तौर पर रहें. विश्वकप समाप्त होने के बाद उनका फॉर्म बहुत अच्छा नहीं रहा और साल 2012 के बाद चयनकर्ताओं के नजर से भी दूर होते चले गए. हालांकि इस दौरा उन्होंने IPL में जबरदस्त प्रदर्शन किया. वे आईपीएल में भी कई विजेता टीमों के हिस्सा रहे. साल 2020 के ऑक्सन में जब किसी भी टीम ने उन्हें नहीं चुना तो उन्होने साल 2021 में अंतरर्राष्ट्रीय क्रिकेट से सन्यास की घोषणा कर दी. हालांकि उन्होंने यह कहा था कि वे विदेशी लीग में खेलते रहेंगे.

यूसुफ ने अपने अंतरराष्ट्रीय कैरियर में 57 वनडे में 810 रन बनाये तो वहीं 22 टी-20 में 236 रन बनाए हैं. वनडे कैरियर में एक शतक और दो अर्धशतक भी है. IPL में इनका प्रदर्शन शानदार रहा है. बाद में दोनों भाइयों ने मिलकर पठान क्रिकेट एकडमी की शुरुआत की है जिसमें क्रिकेटरों की आने वाली नई पीढ़ियों को तैयार कर रहे हैं.

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