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भारत का वह गेंदबाज जिसने बिना ब्रेक लिए फेंक दिए 59 ओवर

Bihari News

टेस्ट डेब्यू पर 16 विकेट लेकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, एक सीरीज ने खत्म कर दिया करियर !

अपने अंतराष्ट्रीय टेस्ट डेब्यू की दोनों पारियों में 8-8 विकेट लेने वाला भारत का पहला गेंदबाज

टेस्ट डेब्यू पर 16 विकेट चटकाने वाला दुनिया का दूसरा गेंदबाज

फर्स्ट क्लास डेब्यू पर भी लिया था फाइव विकेट हॉल

पहले भारतीय गेंदबाज, जिन्होंने लगातार 3 वनडे में लिए 4-4 विकेट

भारत का वह गेंदबाज जिसने बिना ब्रेक लिए फेंक दिए 59 ओवर

 क्रिकेट में लेग स्पिनर का अपना रुतबा है, शेन वार्न और अनिल कुंबले दोनों को महान खिलाड़ी कहा जाता है. स्पिनरों का क्रिकेट की दुनिया में अपना अलग महत्व है. हर टीम में वो एक तुरुप के इक्के की तरह होते हैं. इनकी खास बात ये होती है कि ये गुच्छे में विकेट लेते हैं, 1 या 2 विकेट से इनका पेट नहीं भरता. भारत ने विश्व क्रिकेट को एक से बढ़कर बल्लेबाज दिए लेकिन जहां तक बात हो स्पिन गेंदबाजों की, इस देश ने कई दिग्गज स्पिनर दिए, जो अकेले अपने दम पर मैच का रुख मोड़ देते थे. चक दे क्रिकेट की टीम लेकर आई है एक ऐसे ही हैरंतगेज भारतीय स्पिनर की जानी अनजानी और अनकही बातों को.

भारत के इस लेग स्पिन गेंदबाज ने मात्र 19 साल की उम्र में अपने टेस्ट डेब्यू पर वेस्टइंडीज जैसी तगड़ी टीम के खिलाफ दोनों पारियों में 8-8 विकेट लेकर सनसनी मचा दी थी. इस लेख में बात होगी भारतीय टीम के पूर्व लेग स्पिनर नरेंद्र हिरवानी के बारे में. नरेंद्र हिरवानी को उनके शानदार रिकॉर्ड ब्रेकिंग टेस्ट डेब्यू के लिए याद किया जाता है. भारत के लिए सिर्फ 17 टेस्ट और 18 वनडे खेलने वाले नरेंद्र हिरवानी ने अपने टेस्ट डेब्यू पर दोनों पारियों में 8-8 विकेट लिए थे यानी मैच में कुल 16 विकेट जो कि एक विश्व रिकॉर्ड है. ऑस्ट्रेलिया के बॉब मेसी के बाद हिरवानी दुनिया के दूसरे खिलाड़ी थे जिन्होंने टेस्ट अंतराष्ट्रीय डेब्यू पर 16 विकेट चटकाए थे. बॉब मेसी ने 1972 में लॉर्ड्स में इंग्लैंड के खिलाफ अपने टेस्ट डेब्यू की दोनों पारियों में 8-8 विकेट लिए थे, मैच फिगर था 137 रन देकर 16 विकेट. हिरवानी ने 16 साल बाद फिर से इतिहास दोहराया. हिरवानी और मेसी के डेब्यू में बस इतना अंतर था कि हिरवानी ने मेसी से 1 रन कम खर्च किए थे. वेस्टइंडीज के खिलाफ उस मैच में नरेंद्र हिरवानी का आंकड़ा था 136 रन देकर 16 विकेट. लेकिन इतने शानदार डेब्यू के बावजूद वो भारत के लिए ज्यादा मुकाबले क्यों नहीं खेल पाए ? आखिर क्या वजह रही कि इतने शानदार लेग स्पिनर का करियर सिर्फ 17 टेस्ट मैचों का ही रहा ? बताएंगे इस लेख में

नरेंद्र हिरवानी का जन्म 18 अक्टूबर, 1968 को गोरखपुर के एक संपन्न परिवार में हुआ था, वो सिंधी हिंदु थे, उनके पिता एक ब्रिक फैक्ट्री के मालिक थे. हिरवानी किशोरावस्था में ही इंदौर शिफ्ट हो गए और मध्य प्रदेश के क्रिकेटर संजय जगदले के मार्गदर्शन में ग्राउंड के बगल में एक कमरे में रहने लगे. कोच जगदले ने हिरवानी में छिपे एक बेहतरीन लेग स्पिन गेंदबाज को पहचान लिया था, इसलिए वो उनकी गेंदबाजी पर काम करने लगे. और देखते ही देखते हिरवानी ने मध्य प्रदेश की तरफ से अपना फर्स्ट क्लास डेब्यू कर लिया, तब वो सिर्फ 16 साल के थे. 1984/85 रणजी सीजन में नरेंद्र हिरवानी ने अपने डेब्यू मैच में फाइव विकेट हॉल पूरा कर लिया यानी 5 विकेट चटका दिए. इसके बाद अगले सीजन में भी हिरवानी की गेंदबाजी बेहतर होती चली गई. इसी दौरान अंडर-19 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3 टेस्ट मैचों की सीरीज में हिरवानी ने 23 विकेट लेकर कमाल कर दिया. लेकिन उनको ब्रेक मिला 1987-88 वेस्टइंडीज के भारत दौरे के दौरान, जब उन्होंने इंडिया अंडर-25 की तरफ से खेलते हुए मैच की दूसरी पारी में 6 विकेट चटका दिए थे. इसी के बाद उनको भारत की टेस्ट अंतराष्ट्रीय टीम से बुलावा आ गया.

वर्ष था 1988, वेस्टइंडीज की टीम भारत दौरे पर आई थी. मद्रास में खेले गए सीरीज के अंतिम टेस्ट मैच में नरेंद्र हिरवानी ने अपना टेस्ट इंटरनेशनल डेब्यू किया था. भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में कपिल देव के शतक की बदौलत 382 रन बनाए. विवियन रिचर्ड्स की अगुवाई वाली वेस्टइंडीज के बल्लेबाजी क्रम के लिए ये स्कोर कुछ नहीं था लेकिन 19 साल के हिरवानी ने ऐसी जिगरबाजी दिखाई कि बड़ेबड़े दिग्गज धूल चाटने लगे. नरेन्द्र हिरवानी ने विवियन रिचर्ड्स को गूगली पर बोल्ड कर दिया इसके बाद तो बस हिरवानी ही हिरवानी थे. वेस्टइंडीज की टीम सिर्फ 184 रनों पर ढेर हो गई, हिरवानी ने 18.3 ओवर में 61 रन खर्च करते हुए 8 विकेट झटके. भारत ने दूसरी पारी 217/8 पर घोषित कर दी और वेस्टइंडीज को 416 रनों कम लक्ष्य मिला. लेकिन वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों के पास हिरवानी का कोई तोड़ नहीं था वो एक एक कर हिरवानी का शिकार बनते चले गए और हिरवानी ने मैच की दूसरी पारी में भी 8 विकेट चटका लिए और अनूठा रिकॉर्ड बना दिया. वेस्टइंडीज की मजबूत टीम एक युवा स्पिनर के सामने धराशाई हो गई. पूरी टीम दूसरी पारी में 160 रनों पर सिमट गई और भारत ने मुकाबला 255 रनों से जीत लिया. हिरवानी को उनकी शानदार गेंदबाजी के लिए प्लेयर ऑफ द मैचचुना गया. हिरवानी डेब्यू टेस्ट में 16 विकेट लेने वाले दुनिया के सिर्फ दूसरे गेंदबाज बने. इसके अगले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ भी घरेलु सीरीज में हिरवानी ने सफलता के झंडे गाड़े. स्पिन के साथी पिच पर हिरवानी ने 3 टेस्ट मैचों में 20 विकेट चटकाए, उनके पार्टनर अरशद अयूब ने भी 21 विकेट चटकाए थे. अपने करियर के 4 टेस्ट मैचों में हिरवानी के नाम 36 विकेट दर्ज थे, जो किसी भी गेंदबाज द्वारा करियर के किसी स्टेज में सबसे अधिक था.

विकेट चटकाने की अद्भुत क्षमता को देखते हुए हिरवानी को भारत ने वनडे टीम में भी मौका दिया और हिरवानी ने वहां भी निराश नहीं किया. 1987-88 शारजाह कप, जो कि एक त्रिकोणीय श्रृंखला थी नरेंद्र हिरवानी ने 3 मैचों में 10 विकेट चटका लिए थे. इस दौरान वो भारत के पहले गेंदबाज बने, जिन्होंने लगातर 3 वनडे मैचों में 4 विकेट लिए थे. हिरवानी टूर्नामेंट के प्लेयर ऑफ द सीरीज बने थे.

सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन 1989-90 में जब भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज का दौरा किया था, हिरवानी के करियर ने एक टर्न ले लिया. बल्लेबाजों ने हिरवानी के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किया. पोर्ट ऑफ स्पेन जहां की विकेट स्पिनरों को मदद कर रही थी, हिरवानी ज्यादा कुछ नहीं कर पाए. इस दौरे ने हिरवानी के करियर को गहरा चोट पहुंचाया. इसके बाद अपने इंटरनेशनल करियर में उन्हें थोड़े बहुत सफलता ही मिले. हिरवानी बल्लेबाजों को परेशान करने के लिए हवा में काफी धीमे थे वैसे विकेट को छोड़कर जहां गेंद को शार्प टर्न मिलती थी. हिरवानी ने इसके बाद एक और यादगार प्रदर्शन किया. 1991-92 वर्ल्ड सीरीज के अंतिम लीग मैच में वेस्टइंडीज को हराने के बाद ही भारत फाइनल के लिए क्वालीफाई कर सकती थी. हिरवानी ने भारत को फाइनल में पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी. हिरवानी ने ब्रायन लारा को अपने फ्लिपर से स्टंप कराया फिर रिची रिचर्डसन को लेग स्पिन से LBW कर दिया. लेकिन ये उनको वर्ल्ड कप टीम में जगह दिलवाने के लिए काफी साबित नहीं हुए.

इसके 4 साल बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ टेस्ट मैच में हिरवानी को दूसरा मौका मिला. बारिश से बाधित मैच में हिरवानी ने 59 रन देकर 6 विकेट चटकाए थे. 1996 में वो इंग्लैंड दौरे पर गए और इसके बाद घर में दक्षिण अफ्रीका के विरुद्ध 2 और टेस्ट मैच खेले. इसके बाद भारत की टेस्ट टीम में हिरवानी को दोबारा मौका नहीं मिल पाया. 2001 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलु सीरीज में उनको स्क्वाड में शामिल किया गया लेकिन वो कभी प्लेइंग 11 में स्थान नहीं बना पाए. इस सीरीज के बाद हिरवानी प्रेस में गए और टीम में नहीं चुने जाने के कारण भारतीय कप्तान सौरव गांगुली की जमकर आलोचना की थी.

डोमेस्टिक क्रिकेट में नरेंद्र हिरवानी एक प्रमुख गेंदबाज बने रहे. रणजी ट्रॉफी में उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए 400 से ज्यादा विकेट चटकाए. 2005-06 सीजन के अंत में हिरवानी ने फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर को अलविदा कह दिया था. वो क्रिकेट खेलना तो छोड़ा लेकिन क्रिकेट से खुद को दूर नहीं रख पाए.

3 सितंबर, 2014 को मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के रणजी ट्रॉफी टूर्नामेंट सेलेक्शन कमिटी के चेयरमैन के रूप में नरेंद्र हिरवानी ने काम करना शुरू किया. बाद में उनको नेपाल नेशनल क्रिकेट टीम के डायरेक्टर के रूप में एपोइंट किया गया था.

1990 में इंग्लैंड के खिलाफ द ओवलमें खेले गए एक टेस्ट मैच के दौरान नरेंद्र हिरवानी ने बिना रुके 59 ओवर गेंदबाजी की थी, और ऐसा करके उन्होंने वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया. नरेंद्र हिरवानी ने भारत के लिए 17 टेस्ट मैचों की 28 पारियों में 66 विकेट लिए जबकि 18 वनडे मैचों में 23 विकेट झटके. नरेंद्र हिरवानी ने 167 फर्स्ट क्लास मुकाबलों में 732 विकेट हासिल किए हैं वहीं 70 लिस्ट ए मैचों में उन्होंने 75 विकेट अपने नाम किए. किसी टेस्ट अंतराष्ट्रीय मैच में 10 विकेट लेने वाले वो भारत के सबसे युवा गेंदबाज हैं. 19 साल 85 दिन की उम्र में हिरवानी ने वेस्टइंडीज के खिलाफ ये कारनामा किया था. नरेंद्र हिरवानी के एक बेटे हैं, जिनका नाम मिहिर हिरवानी है.

नरेंद्र हिरवानी ने अपने टेस्ट डेब्यू पर 16 विकेट लिए थे और शायद यही उनके करियर का दुर्भाग्य भी बन गया. लोग उनसे हर मैच में वैसे ही प्रदर्शन की उम्मीद करने लगे. वो उम्मीद पर खरे भी उतरे, ऐसा नहीं हुआ कि डेब्यू मैच के बाद उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन नहीं किया या उनकी गेंदबाजी खराब हो गई लेकिन उम्मीदों के बोझ तले दबे हिरवानी को खराब प्रदर्शन का तुरंत दंड भी मिल गया. वेस्टइंडीज दौरे पर सिर्फ एक टेस्ट सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन के कारण उनको टीम से ड्रॉप कर दिया गया और इसके बाद उन्हें सिर्फ 2 मौके ही दिए गए. आपके अनुसार नरेंद्र हिरवानी को टीम से ड्रॉप करने के पीछे क्या वजह रही होगी ? कमेंट में हमें जरुर बताएं.

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